Pragya Sharma   (©Anahita_alive)
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Joined 17 December 2017


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Joined 17 December 2017
Pragya Sharma 8 AUG AT 11:42

हजारों कविताओं में
एक कविता तुम ऐसी भी लिखोगे
जिसमें होगा जीवन का मर्म...
तुम उड़ेल डालोगे
अपनी सम्पूरण आत्मा उसमें ...
और भर दोगे पूरा अंतस...
जिसका हर शब्द
अनुभव की भट्टी में तपा हुआ होगा....
तुम सजाओगे उसे
सर्वश्रेष्ठ अलंकारों से
जो इकट्ठे किये थे तुमने कभी
ढूंढ ढूंढ कर...

देखना फिर चमक उठेगा
उसका हर शब्द....
यूँ जैसे चमकता हो कोई चकमक पत्थर...
और
जिसे पढ़कर पाठक को लगेगा
कि मिल गयी है
उसे कोई अनमोल धरोहर ...
देखोगे उस दिन तुम
तुम्हारे शब्दों को
छूने वाले हाथ चन्दन...आँखें सितारे
और मन कुंदन हो जाएंगे....
.
और तुम्हारा नाम उनके ज़हन में
सदा के लिए अंकित हो जाएगा ...


उस दिन तुम सही मायनों में एक लेखक कहलाओगे....

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Pragya Sharma 4 AUG AT 15:21

किस्मत पत्थर की थी लेकिन फूलों का हार मिला है...
चाहा नहीं जितना उससे कहीं ज्यादा प्यार मिला है...
तू कहाँ रहता है खुदा जानती नहीं तेरा ठौर ठिकाना
मुझे तो बस अपने दोस्तों में ही तेरा दीदार मिला है ...

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Pragya Sharma 11 JUL AT 22:31

जब हृदय
भाव शून्य हो उठेगा मेरा....
जब संवेदनाएं
पलायन कर जायेंगी सारी...
जब यह हृदय सागर
पूरा रित जायेगा...
जब ढूंढ़ने से
भी कुछ नहीं मिलेगा...
जब यह मन कब्रिस्तान बन चुका होगा...
जब देह उद्यान श्मशान बन चुका होगा....
तब....
तब तुम उतरना इस रिक्त हृदय में...
और दूर तक चलना...
हां थक जायेंगे तुम्हारे पैर...
पर तुम चलना न छोड़ना...
जब तक कि
हर एक छोर न छू लो
मेरे हृदय का...
जानते हो...
कहीं दूर जाकर अचानक...
तुम ठिठक जाओगे...

हाँ कुछ है जो तुम्हें
थमने को मजबूर कर देगा.....
धक धक...धक धक...धक धक...
कुरेद कर देखना...
वहीं मेरे हृदय की जमीन के नीचे
बरसों से दफन ...अधमरा सा...
तुम्हारी प्रतीक्षा में
मेरा प्रेम सांसे ले रहा होगा....

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Pragya Sharma 7 JUL AT 21:21

वो तृष्णा में डूबा रहा...
मृग सा भागा इधर से उधर
जीवन के रेगिस्तान में...

पूछता रहा प्रेम का मतलब...
जो मिलता उसी से
हर इक ही इंसान से ...

पर जाने क्यों वो समझा ही नहीं
वो आखिर क्या था ...
कल शाम जब माँ ने पूछा था ...

"बेटा खाना खाया क्या ???"

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Pragya Sharma 24 JUN AT 12:10

ये दिल घायल...ये आँखें बैचैन..कि सीने में बवाल है ।
ये इश्क़ इश्क़ है या फ़ित्ना कोई लब पे यही सवाल है।।


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Pragya Sharma 19 JUN AT 1:25

कुछ बाएं तो
कुछ दाएं से निकल जाते हैं...
कम दूरी का हिसाब लगाकर....

कुछ जिनमें हिम्मत और साहस होता है
सफल हो जाते हैं ऊपर चढ़ पाने में....

लेकिन जिनमें हौंसले होते हैं
और जो होते हैं अपने धुन के पक्के....
वो चीर डालते हैं
उस पर्वत को ही बीचों बीच से....
और बनाकर उसमें रास्ता
फिर फक्र से सफलता का सफर तय करते हैं.....

कुछ लोग अपने जीवन के मांझी होते हैं.......

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Pragya Sharma 10 JUN AT 7:14

तुम्हारी स्मृति की
एक बूँद गिरी...
जोर से कहीं पर हलचल हुई ...

फट पड़ा कलेजा मेरा ...
और सिसकियाँ चल पड़ी...
ये तूफ़ान समा ना पाया
मन के बाँध में ...

मैंने दांत भींच लिए...
खोला बैराज
और पूरा का पूरा
तूफ़ान आँखों से छलका दिया....

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हाँ मैंने फिर तुम्हें याद किया....

#anahita_alive #yqdidi #yqbaba

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Pragya Sharma 8 JUN AT 2:47

अजीब खूनी दौर है ये कि अजीब तौर तरीके हैं
वसूल ली जाती है ज़िन्दगी अब नोटों के बदले...

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Pragya Sharma 7 JUN AT 14:44

खुदा ने जब कुछ ख़ास बनाने का
सोचा होगा तो जरूर ख़ास लोगों वाला
स्पेशल कोटा टटोला होगा...💕
रंग सादे सब छोड़ दिए सादे लोगों के लिए
और ख़ास कुछ बनाने के लिए
ख़ास रंगों को घोला होगा...💕
अच्छी क्वालिटी की हर बात
इक्वल पोरशन में डाली होगी ...
और उसे भी सौ सौ बार
गुणवत्ता की कसौटी पर तौला होगा...💕

मिठास की एक टन मात्रा ली
और आवाज में घोल दी...
इतनी ही मात्रा स्वभाव में मिला दी...💕
ख़ूबसूरती की दो टन मात्रा ली
और रूप में घोल दी ...
ढेर सारा काजल लिया और
दो सुरमयी अँखियाँ कमल से
चेहरे के बीच खिला दी...💕
पाकीज़गी दिल की जो असीमित है
लगता है खुदा ने यह तो
पूरे ब्रह्माण्ड से ही जुटाई है...💕
बहुत दिल से बनाया है खुदा ने उसे...
अब यूँ ही तो नहीं मेरे पोटू की पर्सनलिटी
इतनी "नायाब" निखर कर आयी है...💕

लोबू बेबी😘😘😘

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Pragya Sharma 4 JUN AT 21:18

आया पयाम उधर से है बस खैरियत का जो
मेरे नमाजी दिल की इधर ईद हो गयी

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