28 JUN 2020 AT 9:35

बस यूंही सड़कों पर धक्का सा खा रहा था,
बस यूंही इस किनारे से उस पर सरकाया जा रहा था
बदली है तुमने मेरी किस्मत कुछ ऐसे,
कहीं नजर ना लगे मेरे वजूद को फिर से
सड़क से उठा तुमने घर के अंदर जो रखा है,
ठोकर देने वालों ने भी निहारना शुरू कर दिया है
तुम्हारे हाथों का है जादू,
या मेरी किस्मत का लिखा है,
आज मिट्टी से मेरे वजूद को किसी हीरे सा रंगा है।

- PanchTatwa Girl