प्राश ✍️..   (प्रShant✒️)
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Joined 23 September 2017


Joined 23 September 2017

'let today's fragile flag-seller,
System's voiceless sufferer..
'turn into tomorrow's spirited
Flag bearer; feisty & stellar!🇮🇳

कोई बेचे गुब्बारे,ये नन्हा रंगीन गुलाब;
आँखों में बसे,उजले भविष्य के ख़्वाब!
अविरत जीवन संघर्ष में,उलझ गए वो;
जिन हाथों में होनी थी,कलम-क़िताब!
पोषण-पढ़ाई से,जो वंचित ये रहे आज;
आनेवाले कल को,हमें देना होगा जवाब!

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Fervent celebration,or faith-filled chanting; G
Vast are the modes of access,all enchanting! ⚛️
May skip rituals,or harbour staunch belief;🙌 D is
When in suffering,you seek refuge & relief!🍂 G
Simply refuse the very presence,or the form; R
Yet you pray,when caught in a raging storm! E
Invisible force then,gently holds your hand; A
God's omnipresent..across seas,skies & land!🌼 T🙏

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Set to become one, for infinity..💌
Sacred souls feel, tranquil felicity!

Metamorphose from, restless 'me'..
Myself, into still and serene 'You'!🌾

Existence, akin to leafless tree..🍂
Quietly harbours, a vivacious hue!

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अधीर धरा को भिगो देे जैसे,रिमझिम झूम बरसता सावन;⛈️
प्रीत की सौंधी सुगंध से महका दूँ..मग्न मीत का मन आँगन।

छट जाएंगे मेघ विरह के,निकट अब मिलन ऋत आगमन;🍃
कली कोमल तू खिल उठे पुलकित..बन जाऊँ मैं मंद पवन।



Scent of reminiscent rain;
💖बरसे नैन, सजन तरसे सारी रैन!

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ये आँसू बेख़बर..
कुछ इस क़दर धोखा देते हैं;
जिन्हें भूलना चाहते हम..
उन्ही को बेवक़्त,
याद दिला देते हैं!

बड़ी शिद्दत से..
सँभालते पलकों तले,इन्हें हम;
हमारी अहद-ए-वफ़ा का..
अश्क़-ए-नादाँ,
ख़ूब सिला देते हैं!

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भूखा चाहे निवाला,युवा रोजगार; ☸️✝️☪️
धर्म,जाति-पाति के नारे बेकार!📢
रोज़ पेट काटकर,जीने वालों को;
रोटी,कपड़ा,मकान की दरकार!🏘️
फिर गूंजी,'चौकीदार' की ललकार;
जनता को,विकास पर्व का इंतज़ार!
क्या वंचितों को,मिलेगा 'आधार';🎈 Again,Modi sarkar;
सपनों के गुब्बारे,होंगे क्षितिज पार?




People's aspirations..
Politicians' ambitions;
Will the two ever align.. सपने इनके होंगे साकार?
By accident,or design?
Path of true progress..
Hope our Netas define;
Not just rile & malign..
Tart tone;'ll they refine?

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जानी दुश्मन कल के,बन गए आज जिगरी यार..
काँटे जिन्होंने बिछाए,पहनाए वो फूलों का हार!
ठीकठाक थे इस तरफ़,यकायक चले उस पार.. 🌫️🚣🌫️
इन दलबदलू नेताओं की,मिलकर जयजयकार;
सकते में जनता,पल्ले न पड़े ये अज़ीब व्यवहार!

नियत भली,समाज प्रति समर्पित और ईमानदार; 📢🎙️📢
कुटिल चुनावी चक्रव्यूह में,पर न हुआ बेड़ा पार! 'Poll pledge;
सब के बस की बात नहीं,वोट-नोट का चमत्कार.. h⭕️ll⭕️w ring!
सत्ता के सौदागरों को,हैं हमारा साष्टांग नमस्कार; Little relief;
बदलता चरित्र राजनीति का,करना होगा स्वीकार! it will bring!'

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हिफ़ाज़त के लिए तेरी, ईश्वर से रोज मैं दुआ माँगूँ; "No need
सो पाएं जो तू चैन से, पहरा दे सारी रात जागूँ!😾 to worry;
एहसानों का कर्ज़ तेरे, साथी कुछ ऐसे अदा कर दूँ; mate..
तुम्हें नसीब हो फ़ुर्सत के लम्हे, मैं चाहे जितना भागूँ! 'm with you
🍃😻🍃
Time to let whiskers down, and unwind.
Today, it indeed has been a tough grind! साथी मेरे;
Tired you're buddy, catch forty winks..🙀 मैं सदा..
One's on guard, when the other blinks! तुम संग हूँ!"

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Yes! of the people, and by the people;
Dangling carrot🥕fruit of democracy..
For we the people; its core so simple;
Why then a few, appear more equal?

Weary masses, the elite in fine fettle;
Unkept promises🙌blatant hypocrisy..
Hefty manifestos, seem a dull sequel;
Old wine, poured in fancy new bottle!

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बिठा देते हैं मुझे 'मंदिर' में,परंपराओं के चंद बाशिंदे;
ऊँची-ओछी नसीहत देकर..पती ही अब तेरे परमेश्वर!
'गर करना हैं बिटिया,पार तुम्हे संसार का भवसागर;
आँखें मूंदकर चलना तुम,बस उनके नक़्शे कदम पर!

'अष्टपुत्रा सौभाग्यवती'..बड़े-बूढ़े दे,सौ सौ आशीर्वाद;
बदल जाते ज़िंदगी के मायने,शादी की रस्म के बाद!
ससुराल की पक्की दीवारें,बनती सहमी सीमा रेखा;
चौतरफ़ा फ़ैला खुला क्षितिज,शायद ही कभी देखा।

दिल करे मंद पवन की सुगंध,कभी साँसों में भर लूँ;
ख़्वाईशों के पंख लगाकर,आसमान मुठ्ठी में कर लूँ!
दूर उड़ जाऊँ मस्तमगन,रिवाज़ों की बंदिशे छोड़कर।
लांघ दूँ चौखट,रिश्तों नातों की 'नर्म' जंजीरें तोड़कर!

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