प्राश ✍️..   (प्रshant🖋)
11.2k Followers · 2 Following

read more
Joined 23 September 2017


read more
Joined 23 September 2017
प्राश ✍️.. 13 DEC 2019 AT 9:34

💦गहराया कोरोना का साया🌑तुमसे ही करार पाया!💖


ठहरे जिस कठिन डगर पर तू,वो पड़ाव बन जाऊँ;
त्यागकर गर्वित अहम् भाव,स्वयं को पूर्ण बिसराऊँ!

बादल जो घिर आए,किरणों की लालिमा पहुँचाऊँ;
तपती धूप में छाँव,सपनों का गाँव सलोना बसाऊँ!

दूरी में रहे अचल प्रीत बंधन,हर स्पंदन में तुझे पाऊँ;
कोरोना से बचना लाज़मी,अंतस् आसमाँ बन छाऊँ!

-


Show more
2225 likes · 1264 comments · 18 shares
प्राश ✍️.. 16 NOV 2019 AT 11:27

Life's cycle;timelessly trends..
swirls zig-zag,suddenly bends;
Neither turns back,nor mends!
message,loud & clear it sends..
Formless chain,gently extends;
even after,worldly bond ends!❇️
🍃🏵️☘️🍂☘️🏵️🍃

पंचकर्म से प्राणी,काया साफ़ सुथरी सँवर-निखर जाय;
मैले मन का दाग छिपे तनिक,साबुन ऐसो कौन बनाय!
वासना में लिप्त किया समय व्यतीत,मूढ़ अब पछताय;
नश्वर तन,आत्मा चिरंतन अस्तित्व चक्र युग युग चलाय!
शरण सत्वर प्रभु के चरण,साधु-संत ज्ञानी एहि समझाय;
पवित्र आचरण सहचर सेवाभाव,बिन कोऊ न् पार पाय!
कर ले ईश्वर सुमिरन,अखण्ड ज्योति घट उजियारो छाय;
न् हो दूजा मुक्ति का मनुज उपाय,सरल जीवन तू बिताय!

-


Show more
1452 likes · 261 comments · 5 shares
प्राश ✍️.. 25 OCT 2019 AT 8:25

जीवन के पथरीले पथ पर पग पग ठोकर खाई,मिले हरजाई;💥 H
धूप हो या छाँव हमेशा मैं नंगे पाँव,कौन करे हौसला-अफ़ज़ाई! A
P
गिरते-सँभलते,अकेले चलते रोज़ झुठलाते कितने ही तमाशाई; P
आँसू छुपाकर,मंद मुस्कुराकर;सह ली ज़माने भर की रुसवाई! Y
☄️💖☄️
चिंताओं को सिरहाने रखकर,तारों संग रात अँधियारी बिताई;🌑 D
ना पिता का प्रेम पाया,ना ही माँ ने कभी सहलाकर लोरी गाई! I
W
अनुभव हो गुरु,जीवन की पाठशाला ने रूह मेरी सख़्त बनाई;🔱 A
कठोर मन ये हुआ कठिन पर,क्यूँ पलकों पे अचानक नमी छाई! L
I
स्वार्थ ही चलन,कुटिल रीत इस जगत की किंचित ना रास आई; buddy!
भोले साथी की मूक भाषा,तुमसे ही जानी मैने रिश्तों की गहराई! 🐶

-


Show more
1379 likes · 231 comments · 6 shares
प्राश ✍️.. 8 OCT 2019 AT 8:41

{❇️मृगतृष्णा की तलाश🌋Gratification,false solace🌈}

चारों तरफ़ ये ऊँचे संगमरमरी मकान;सिकुड़ गया आसमान.. 💖Pleasure:
मॉल जो कहलाए मन को अति भाए;आकर्षक आलीशान। carnal,
ज़रूरतें सारी पूरी करे हमारी; शीशे के चिकने-चुपड़े दुकान! or
जेब खोलकर मिले यहां पर;भाँति-भाँति के सतरंगी सामान.. eternal
जिस्म के भूखे नंगे निठल्ले;मंडराते खुल्ले सुबह और शाम। ❓
बिक जाते,लूट जाते,मिट जाते शोषित;मिस्ल-ए-रूह बेजान!

अँधेरे की आड़ में लगाते बोलियां,बढ़चढ़कर मुबस्सिर क़द्रदान..
चलते-फिरते दुकान ख़ुद ही हुए नीलाम;बेच अपना धर्म-ईमान।
जज़्बातों का अब रहा ना मोल;देख तमाशा आहत हैं भगवान! ⚜️
अपनों की तलाश में घूमा गली-कूचा मोहल्ला;मंज़र था वीरान..
भरी भीड़ में सारे ही लगे अंजान;शायद बसते नहीं यहां इंसान।
दुखते दिल को मिला न् आराम;काश खरीद पाता मैं इत्मिनान! ☘️


I skip-n-hop,shop to shop; बाख़बर कोई उस्ताद,दिलाता अंतर्ज्ञान;
Soaked in,bodily pleasure! 🔥 मुरीद होता,छोड़ कर ये ऐशोआराम;🕍
Bliss,life ocean's tiny drop; 💧 मुझसे मेरी कराता,नए सिरे से पहचान;
How to,define & measure? सोए ज़मीर को,मिलता जीवनदान!🏵️

-


Show more
1243 likes · 183 comments · 2 shares
प्राश ✍️.. 21 SEP 2019 AT 8:18

⚡Wish! I was a cigeratte butt blazy;
For dazed you, to puff & inhale my musky smoke!
🌫Wish! 'was a glistening glacier glazy;
In my icy, chilly embrace; you may melt & choke!


💘Intense belonging; saced ash..
Incessant craving; mere trash!

💖☘️🌾🌹🌾🍁🍃🌺🍃🌷☘️

🔥जो ख़ाक हो जाऊँ; तुझमें करार पाऊँ!


🌪धुआँ धुआँ हो उड़ जाती ऐ हमनशी, कश पे कश जो लगाता..
🌬️इसी बहाने कस के मुझे अपने सीने से, तू दम भर लेता।☄️

-


Show more
1269 likes · 215 comments · 4 shares
प्राश ✍️.. 31 AUG 2019 AT 8:08

नई पीढ़ी हो अग्रसर,प्रगती पथ पर! 🌿
जीवन ख़ुशहाल,शांतीमय-सुखकर;
आश्वस्त बालक,बने जिसका केंद्र!👧
सर्वांगीण विकास उनका,मूलमंत्र;👦 ज
साकार करे,ऐसा महान प्रजातंत्र!🇮🇳



For a proud new generation.. 🇮🇳
Reach & teach we all must;📚
Each of our future citizen!👫
Pillars of a robust Republic.. हिं
Hold our hope & aspiration!🇮🇳



वतनपरस्ती,न एक दिन का त्यौहार..
दे इन्हें हम,चैनो अमन का उपहार!🇮🇳
अपने जज़्बे का,रोज़ करे यूँ इज़हार.. 🎈

-


Show more
1373 likes · 240 comments · 9 shares
प्राश ✍️.. 11 AUG 2019 AT 8:17

'let today's fragile flag-seller,
System's voiceless sufferer..
'turn into tomorrow's spirited
Flag bearer; feisty & stellar!🇮🇳
❇️🤹📖✒️❇️

कोई बेचे गुब्बारे,ये नन्हा रंगीन गुलाब;
आँखों में बसे,उजले भविष्य के ख़्वाब!
अविरत जीवन संघर्ष में,उलझ गए वो;
जिन हाथों में होनी थी,कलम-क़िताब!
पोषण-पढ़ाई से,जो वंचित ये रहे आज;
आनेवाले कल को,हमें देना होगा जवाब!

-


Show more
1489 likes · 248 comments · 5 shares
प्राश ✍️.. 21 JUL 2019 AT 7:32

Fervent celebration,or faith-filled chanting; G
Vast are the modes of access,all enchanting! ⚛️
May skip rituals,or harbour staunch belief;🙌 D is
When in suffering,you seek refuge & relief!🍂 G
Simply refuse the very presence,or the form; R
Yet you pray,when caught in a raging storm! E
Invisible force then,gently holds your hand; A
God's omnipresent..across seas,skies & land!🌼 T🙏

-


Show more
1355 likes · 271 comments · 1 share
प्राश ✍️.. 17 JUN 2019 AT 8:07

अधीर धरा को भिगो देे जैसे,रिमझिम झूम बरसता सावन;⛈️
प्रीत की सौंधी सुगंध से महका दूँ..मग्न मीत का मन आँगन।

छट जाएंगे मेघ विरह के,निकट अब मिलन ऋत आगमन;🍃
कली कोमल तू खिल उठे पुलकित..बन जाऊँ मैं मंद पवन।



Scent of reminiscent rain;
💖बरसे नैन, सजन तरसे सारी रैन!

-


Show more
1370 likes · 231 comments · 11 shares
प्राश ✍️.. 30 MAY 2019 AT 8:12

ये आँसू बेख़बर..
कुछ इस क़दर धोखा देते हैं;
जिन्हें भूलना चाहते हम..
उन्ही को बेवक़्त,
याद दिला देते हैं!

बड़ी शिद्दत से..
सँभालते पलकों तले,इन्हें हम;
हमारी अहद-ए-वफ़ा का..
अश्क़-ए-नादाँ,
ख़ूब सिला देते हैं!

-


Show more
1413 likes · 189 comments · 14 shares

Fetching प्राश ✍️.. Quotes

YQ_Launcher Write your own quotes on YourQuote app
Open App