Poetry By Heartt   (✍🏻poetry_by_heartt)
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Joined 8 May 2020


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13 JUL AT 10:02

अंधेरे सिर्फ डराने का
काम नहीं करते
कई बार वे हमें समेटने का
हमें खुद में छुपाने का
काम भी करते हैं
और उन अंधेरों से
हमें डर नहीं लगता

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9 JUL AT 20:49

कि जिन बातों को
ज़ुबान पर लाया नहीं जाएगा
ऐसा थोड़े ही है कि उनका ख़याल
दिमाग़ में न आएगा
हाँ ये हो जाएगा
कि
तुम्हें सुनने में न आएगा
और दिल…..
दिल का क्या है
वो भारी होता जाएगा

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2 JUL AT 22:17

चाहत बेपनाह होगी मगर धीरे धीरे

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15 JUN AT 10:10

शहर में रात-दिन अपने-अपने कामों में सब खोए रहते हैं
और शहर ख़ुद को बदलते देख अपने में खोए रहता है

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14 APR AT 0:05

मैं कहूँ तुमसे
आज एक बार फिर
उसी पुरानी टपरी पर चाय पीने को
तो आओगे क्या ???
या मेरी बात सुनकर
मन में अतीत वर्तमान बुनकर
फिर वर्तमान को अतीत के ऊपर चुनकर
टाल दोगे मेरी बात को
भुला दोगे हमारे साथ को
और फेर लोगे मुँह
ये सोचकर कि
शायद…..
अब ये ही सही होगा
हमारा फिर से मिलना नहीं होगा

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6 MAR AT 0:27

वो देखते तो हैं पर उन्हें दिखता नहीं है
एक विचार भी अच्छे से टिकता नहीं है
और यूँ तो ख़ुद को सही दिखाने को
वो बेचते हज़ार बातें हैं……
और यूँ तो ख़ुद को सही दिखाने को
वो बेचते हज़ार बातें हैं……
पर थोड़े अनुभवी हो गए हैं हम भी
कि अब उनका कोई तथ्य बिकता नहीं है

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1 JAN AT 11:29

आज फिर नए सफ़र की एक नई शुरुआत हो रही है
सपनों को, इच्छाओं को पूरा करने की बात हो रही है
जो कुछ पूरा कर पाए उसकी ख़ुशी है
जो पिछला कुछ अधूरा रह गया उससे सीख ली है
नए सफ़र की तैयारी नए जुनून के साथ हो रही है
चारों तरफ़ 2025 की मुबारकबाद हो रही है

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4 DEC 2024 AT 23:08

कुछ शिकायतें
खामोशी का दामन कभी
छोड़ नहीं पाती

वो ओढ़े रहती हैं
खामोशी का घूँघट
और चुप-चाप
इंतज़ार करती हैं
उन दो शब्दों का
जो इस घूँघट को उठाएँगे
वे शब्द जो थोड़ा
दिल को सुकून पहुँचाएँगे
वे शब्द जो खामोशी का
दामन छुड़ाएँगे
वे शब्द जो
नाराज़ होने का हक़ दे जाएँगे
वे शब्द जो
इसे अपना कह जाएँगे

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29 NOV 2024 AT 15:32

‘वे कुछ लोग’

सामने आए बिना किसी के सहारे
बंदूक चलानी है???
किसी न किसी का कंधा
मिल ही जाएगा!!!

बिना काम किए
मंज़िल पानी है???
कोई स्वामी अंधा
मिल ही जाएगा!!!

ये किसी एक दिन
कुछ साबित करने की ख़ातिर…..
जो सबूत इकट्ठे करते हो तुम
अपना गला सँभाल कर रखना
कभी कोई फंदा
मिल ही जाएगा!!!!

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7 OCT 2024 AT 22:48

श्रम

तपती धूप में
श्रम बिंदु हों माथे पर
और अधरों पर
फैली हो मुस्कान बड़ी

तब मेहनत भय को
खा जाती है
हो चाहे सामने
कितनी मुश्किल खड़ी

धैर्य बगल से झाँख तब
हौसला बढ़ाता दिखता है
सामने खड़ा पहाड़ भी हो
वो तुम्हारे सामने झुकता है

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