Piyush Sharma   (Piyush)
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Joined 2 April 2017


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Piyush Sharma 9 HOURS AGO

धरती हमसे पूछ रही है, एक बड़ा सवाल
क्या इस विधि रखोगे लाला, तुम मेरा ख्याल

सुना है यहाँ थी, खूबसूरती हर तरफ
परछाईं भी अब जिसकी, दिखे फटेहाल

ये अपनी ही तकलीफ है यार
अपने ही, जी का जंजाल

दिल में थोड़ी आस रख, ज़ेहन में ज़िम्मेदारी
ये अपना चमन है, इसे हम ही करेंगे निहाल

थका दिया यार, इस दौड़-ए-ज़िन्दगी ने
खून सारा चूस लिया, खूब किया बेहाल

तू अगर इजाज़त दे
बयां करूँ, दिल का हाल

बिसात हमने बिछा दी है
अब, तसल्ली से चलेंगे चाल

इस बार कर दिया है वादा
निभा भी देंगे, किसी साल

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Piyush Sharma YESTERDAY AT 22:56

कितनी देर लगती है, सपने सजाने में
अरसा बिता देते हैं लोग, दिल की बात बताने में

रूठकर चल दिए वो, इश्क़ को रुसवा किया
ज़हमत बड़ी लगाई थी, यार इसे कमाने में

वो कहते थे हमसे, कभी साथ मत छोड़ना
उम्र लग गयी, खुद को हक़ीक़त समझाने में

मिलता होगा कोई तो सुकून, उनको भी यार
तुमसे वादा रहा कहकर, पलट जाने में

राज़ अपने, मैं भी बेबाक कह दूँ किसी से
कोई ढंग का राज़दार, तो मिले ज़माने में

आदत नहीं है मेरी, की शराब का सहारा लूँ
हर शाम बीतती है फिर भी मयख़ाने में

छोड़ो ये इश्क़-मुश्क, छोड़ो ये दुनियादारी
तुम तो बस यही बता दो, क्या बना है खाने में

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Piyush Sharma 20 APR AT 23:02

मशहूर होने का, बचपन का एक ख़्वाब था
हज़ार सवालों का, बस यही एक जवाब था

जागता रहा है दिल, बेलगाम ख्यालों के लिए
कौन समझाता उसे, उसका अलग हिसाब था

कैसे सुनाए तुम्हे, उस रात का अफ़साना
जब आगोश में हमारे महताब था

शब्द पूरे, लौटे ही नहीं प्रतिध्वनि में भी
कुछ तो गड़बड़ थी, शायद मौसम खराब था

कुछ तो सोचो, तोहमत लगाने से पहले
ये वही शक़्स है, जो कभी तुम्हारा आफताब था

किन आँखों से रोएँ हम, दर्द उस माँ का
सरहद पर खड़ा, उसका एकलौता चिराग था

सह कर कई भूडोल, तूफान, बवंडर
मेरे सरज़मीन पर वो मुस्कुराता गुलाब था

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Piyush Sharma 19 APR AT 21:51

दिल के एक कोने में है लगी, जिज्ञासा की आग
मेरे देश की मिट्टी में है, दया धर्म और त्याग

गंगा जमुना सरस्वती यहाँ
तीनों मनाती प्रयाग

है प्रेम की मिसाल ऐसी भी अपने ज़मीन पर
द्वापर की कृष्णधुन पर सुनी कलयुग में मीराराग

प्यार में पहले दिन यहाँ, जब फूल चाहे माशूक़
कोशिश होती है आशिक़ की दे आए पूरा बाग

भय नहीं यहाँ, यमराज का भी
लौटाना पड़ता है उन्हें सावित्री का सुहाग

सोने की चिड़िया का हूँ मैं बाशिंदा
माँ सरस्वती ने खुद लिखा मेरा भाग

नहीं सीखा किसी के आगे झुकना मगर
सजदा उस मालिक को है, जो सीखा गया बैराग

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Piyush Sharma 18 APR AT 23:12

बात उलझ के रह गयी, अधूरा रहा अंजाम
तुझसे ज़रूरी रहा, ज़िन्दगी तेरा नाम

एक झलक जो देखी, तेरी मुस्कुराती नज़र
पिघल ही गया, गुस्सा तमाम

दीवाने को दिखता है, इश्क़ ही हर तरफ
उपहास उड़ाता है ज़माना, करता है बदनाम

बाज़ नहीं आती दुनिया, अपनी हरकतों से
वक़्त-बेवक़्त, मचाती है कोहराम

छत्तीस का आँकड़ा रहा है किस्मत से
तक़दीर से लड़ जाएंगे, कहलाएंगे राम

सत्य का सामना कीजिए, पूरी निष्ठा से
इरादा नेक हो, तो हो जाता है हर काम

दुनियादारी की दौड़ धूप में सुकून खोया
घर लौटूं तो मिले आराम

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Piyush Sharma 17 APR AT 22:04

फ़ैसला हो नहीं पाया, बढ़ते रहे सवाल
नींद ने धोका दिया, घेरते रहे ख्याल

कैसे करे कोई ऐतबार किसी पर
जब अपने ही चलने लगे चाल

ज़िम्मेदारी के बोझ से, ढल गयी जवानी
कच्ची उम्र में ही अब, पकने लगे बाल

समझौता, करता रहा खामोश
अल्फ़ाज़ों ने, अजब की है हड़ताल

गर कहना हो कुछ, तो सोचते ही मत रहिए
बस कह दीजिए, देकर कोई अच्छी मिसाल

कदम कदम पर, बेरहम हुआ इश्क़
दौड़ाया, थकाया, किया बेहाल

ज़िन्दगी, इक सवाल है तुझसे
तब करूँगा, जब तू समझेगी मेरा हाल

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Piyush Sharma 16 APR AT 23:44

ज़िन्दगी की दौड़ में, हँसते हँसाते रहिए
वक़्त निकालकर जनाब, आते जाते रहिए

जाने किस मोड़ पर, मिल जाए कोई यार पुराना
सीटियों की धुन पर, गीत गुनगुनाते रहिए

यादों में रहती है बस छेड़खनियाँ
तमीज़ से न पेश आएं, दोस्तों को सताते रहिए

किस्से सुनकर बहल गए,आँसू छुपा लिए थे
बच्चों को मनाना हो, तो कहानियाँ सुनाते रहिए

मुसकराते चेहरे के आगे हैं फ़ीके, सोलह श्रृंगार
बहाना कोई ढूंढ़कर, मुस्कुराते रहिए

आप बीती में छुपी होती है जग बीती भी
जो मन में आए, बताते रहिए

ये खर्चे ही बन गए, वजह जीने की
इनसे लड़ने को, कमाते रहिए

बहल जाएंगे, ग़म ज़िन्दगी के भी
कोशिशों के बहाने, बनाते रहिए

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Piyush Sharma 12 APR AT 15:34

एक तरफ़ा इश्क़ ने, ऐसे किए हालात
साथ हो कर भी हम, कभी ना हुए साथ

तुमसे मिलना तो था, तस्सवुर में सदा
हालांकि इस कैफ़ियत में, बनी नहीं बात

वो दौड़ कर आयी, सीने से लगी, बोसा दिया
कहाँ भूली जाती है ज़ालिम, वो पहली रात

आशिक़ ने चाहा, चाँद-तारे तोड़ना
हक़ीक़त बेरहम थी, दिखा दी औक़ात

ज़िंदगी की दौड़ में, जला दिया सब
थोड़ा खून, थोड़ा पसीना और थोड़े जज़्बात

सुकून सारा गिरवी रख, कमा ली है दौलत
ऐसे पैसे का मगर, क्या करोगे हज़रात

काफी है ज़िंदगी में, रहगुज़र के लिए
माँ की दुआ का असर, और सर पर रब का हाथ

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Piyush Sharma 11 APR AT 13:43

सफ़र रोशनी का, बेहिसाब था
मेरे हर सवाल का, उसके पास जवाब था

रात की चौखट पर थी नींद
दस्तक देता, फिर वही ख़्वाब था

जमता था जहां, यारों का डेरा
उस जगह, सुंदर सा तालाब था

यादों का पुल, खूबसूरत है बड़ा
बीता हुआ कल, लाजवाब था

देख न पाया उस रोज़, मैं चाँद को
रास्ता रोके, उसका हिजाब था

निकल आयी दराजों से, किताबें पुरानी
जिनमें छुपता-झांकता गुलाब था

मैंने न पूछा उससे, इंतज़ार के बारे में कुछ
उसके पास, सारा हिसाब था

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Piyush Sharma 10 APR AT 20:33

मंज़िल की चाहत में, दिन रात चलते रहे
जिन्हें मयस्सर न हुई, वो हाथ मसलते रहे

उनके संदेश, रास्ते में खो जाते हैं कहीं
और हम, सदा जवाब की तलाश में जलते रहे

जीवन ख़ुद में उपलब्धि है
मज़ा दुगना हो जाए, जो आप मिलते रहें

गुलिस्तां ने चाहा, अपने ख़ुदा से बस इतने
बहार आती रहे, फूल खिलते रहें

गुज़ार दी सर्दियां, जिस धूप की इंतजार में
गर्मियों में उन्हीं में उबलते रहे

ठानी जब किसी दीवाने ने ग़ज़ल लिखने की
अल्फ़ाज़ खुदबखुद निकलते रहे

कहाँ रहते हो आजकल, पूछा उन्होंने
हम रेत की तरह, हाथ से फिसलते रहे

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