Piyush Sharma   (Piyush)
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Joined 2 April 2017


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Joined 2 April 2017
Piyush Sharma 3 HOURS AGO

बस, इतना मुझ पर, ज़िन्दगी, एहसान कर
सुलूक कोई कर, मुझे पहचान कर

कभी करना कुछ, ऐसा भी
खोए हुए लोगों से मिलना, जान कर

जीवन चक्र है, सुख दुःख, चलता रहता है
ज़रूरी है, किसी को गले लगाना, अपना मान कर

माथे पर चाहे, अंगार सुलग रहा हो
लाज़मी रहता है, बर्फ़ रखना, ज़बान पर

दिमाग पर काबू, और जिगर में जुनून हो
तो पहुंचा जा सकता है, हर मुकाम पर

पिंजरे में, क़ैद तो किया जा सकता है परिंदा
मगर, ताला नहीं लगाया जा सकता, उसकी उड़ान पर

सरहद नहीं कोई, सोच और जिज्ञासा की
इंसान चाहे, तो घर बना ले, आसमान पर

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Piyush Sharma YESTERDAY AT 22:11

क्या बला है ज़िन्दगी, क्यों लगी है आज़माने में
सारी उम्र गंवा दी मैंने, दुनिया को रिझाने में

समाज बनाए थे हमने, साथ रहने के लिए
जाने क्या सूझी, जुट गए, सबको हराने में

उम्रभर की दौड़ से, बड़ी की थी औलादें
एक पल न लगाया बच्चों ने, एहसान जताने में

ओ मन मेरे, धीर धर, ये अना के मारे हैं
सदियां बीत जाएगी, इन्हें हक़ीक़त समझने में

अल्फाज़ों को तवज्जो न दो, बात पर गौर फार्माओ
तल्ख़ लहज़ा अपनाना पड़ता है कभी, नर्म बात बताने में

ऐब, इतने भी ज्यादा नहीं है मुझमें
बुराई मिलती है, बस आईना दिखाने में

माँ कहा करती है, मेरा हिस्सा है तू, मेरी ही तरह रहेगा
बहुत मशक्कत करनी पड़ेगी, तुझे, बदल जाने में

मुझसे लड़ने से पहले, मेयार अपना देखलो
उम्र गुज़र जाएगी, मुझ तक आने में

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Piyush Sharma 13 JUN AT 23:44

ख़्वाबों की फ़स्ल, इस क़दर लहराती है
मैं जहाँ देखूं, तू ही नज़र आती है

बात करके तुझसे, इतनी तो तसल्ली होती है
तू आज भी, मुझसे इश्क़ निभाती है

ये कैसा मायाजाल, रच देती है तू, हर दफ़ा
मैं देख नहीं पाता तुझे, तू मुझे देख जाती है

मैं भूल ही जाता हूँ, क्या कहना था
तू जब-जब, मुझे देखकर मुस्कुराती है

मैंने तुझसे, जब भी कुछ पूछा
तू, कुछ और ही बताती है

तू मेरी बातों का, सीधा जवाब क्यों नहीं देती
वजह-बेवजह, बस शब्दों में उलझाती है

एक पल की नाराज़गी का, मोल क्या होता है
मुझसे पूछो, संवारने में उम्र कम पड़ जाती है

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Piyush Sharma 12 JUN AT 23:13

बोतलों से पी नहीं कभी, मुझे आँखों से पीना आता है
एक बस, उसी की आवाज़ सुनकर, मुझे जीना आता है

पूरी तरह से यार, हमने कोशिश न की
बस इसी सोच से, माथे पर पसीना आता है

यूँही कह देता हूँ बस, बात दिल की
मुझे कहाँ, मोहब्बत का क़रीना आता है

लगाकर देखो गोता, इश्क़ के दरिया में
हर डूबते को बचाने, कोई सफ़ीना आता है

किस स्याही से लिखी होगी, किस्मत उसकी
जिसके ख़्वाबों में, माशूक़ कभी ना आता है

हासिल नहीं होती, हर चीज़ कमाने से
कभी कभी, जो चाहो, उसे छीना जाता है

हर वक़्त चेहरे पर, मुस्कुराहट पहने रखता हूँ
लोग सोचते हैं, मुझे हर ग़म सीना आता है

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Piyush Sharma 11 JUN AT 22:20

मुद्दत हुई है बिछड़े पर, तुम्हारी लज़्ज़त नहीं बदतली
मैं लाख करूँ, अदावत तुमसे, मेरी चाहत नहीं बदलती

रोज़ देखता हूँ, तस्वीर तुम्हारी
सब बदलता है, तुम्हारी मुस्कुराहट नहीं बदलती

जब भी मैंने लिखना चाहा था, तुम्हारा नाम लिखा
तुम्हारे ना होने से, मेरी मोहब्बत नहीं बदलती

तुम हमेशा, मेरे ही रहोगे, ये कहना लाज़मी नहीं
पर लाज़िम-नालाज़िम से, हक़ीक़त नहीं बदलती

मुक्कदर में लिखी धूप का, सामना कीजिए
महज़ छांव ढूंढने से, क़िस्मत नहीं बदलती

चाहो किसी को, तो बेगर्ज़ हो कर चाहो
नक़ाब ओढ़ लेने से, नीयत नहीं बदलती

हिज्र होती है, बस जिस्म की "पीयूष"
नाराज़ होने से, क़ुर्बत नहीं बदलती

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Piyush Sharma 10 JUN AT 23:53

वक़्त की कश्ती, किनारे पर, थमी रह जाती है
दिनभर मुस्कुराती आँखों में, नमी रह जाती है

दिनभर रहता हूँ, कुछ पाने की जोड़ तोड़ में
रात, ख़्वाब में फिर भी, कमी रह जाती है

ख़ाक हो जाती है, हर सफलता
मुश्किल वक़्त में, साथ नाकामी रह जाती है

एक खूबसूरत चेहरा काफी है, महफ़िल जमाने को
सबकी नज़रें, बस जमी रह जाती है

बड़ी कशमकश से सीखा, जो है उसमें ख़ुश रहना
सुना है, सिकंदर के हिस्से भी, दो ग़ज़ जमीं रह जाती है

ज़िन्दगी कैसी बीती, किसे फर्क है
तवारीख़ में तो बस, कामयाबी रह जाती है

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Piyush Sharma 9 JUN AT 22:20

नाराज़गी सी, तुम्हारी ज़िद भी, भली है
हम यहीं मिले थे, ये वही गली है
सुनो, अब वापस लौट रहा हूँ मैं
बारिश हो रही है, हवा चली है
सूखे पत्ते, ख़ुद झड़ जाते हैं, खिलते नहीं
कुछ लोग, यूँ बिछड़ते हैं, कि मिलते नहीं

अरसा हुआ, कोई खबर नहीं है
मोहब्बत में क्या अब, वैसा असर नहीं है
बड़ी उम्मीद से, राह ताकती रही, नज़र मेरी
क्या करूँ, निराश होने का, इसे डर नहीं है
सूखे पत्ते, ख़ुद झड़ जाते हैं, खिलते नहीं
कुछ लोग, यूँ बिछड़ते हैं, कि मिलते नहीं

हुआ है क्या, कि मेरा ख्याल नहीं आता
जो मुझे आता है, तुम्हें वो, सवाल नहीं आता
लाख करूँ कोशिश, उल्टा दौड़ने की मगर
पलट कर वो, गुज़रा साल नहीं आता
सूखे पत्ते, ख़ुद झड़ जाते हैं, खिलते नहीं
कुछ लोग, यूँ बिछड़ते हैं, कि मिलते नहीं

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Piyush Sharma 8 JUN AT 22:23

जाने दो उसे, अगर उसे जाना है
मुझसे कह दो, जो भी तुम्हें बताना है

वो दूर से ही कहता है, इश्क़ है, पास नहीं आता
कोई खुराफ़ात है दिमाग में, शायद मुझे आज़माना है

ऐसा भी तो हो सकता है, दर्द, पसंद हो उसे
मानो, बेरुख़ी से कोई, रब्त पुराना है

नज़रंदाज़ भी किया जा सकता है, इन बेतुकी बातों को
या यूँ कहूँ, कि नाराज़ होने का, ये सही बहाना है

घर सूना हो गया है, उसके रूठने से
मगर, ये तो, रोज़ का रूठना-मनाना है

तू दुनिया की चिंता छोड़, खुद की सोच
जो निश्चय कर ले, तो ये तेरा ही ये ज़माना है

तरकश से निकाल तीर, निशाना लगा
वो जानता है, उसे किधर जाना है

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Piyush Sharma 7 JUN AT 23:17

और कितना, बेज़ार किया जाएगा
एक दिन तो, हमारा भी इंतज़ार किया जाएगा

जैसी उसकी मर्ज़ी, वैसा उसका किरदार
इसी नज़रिए से उसे स्वीकार किया जाएगा

ज़िन्दगी मैंने चखी है, अपनी शर्तों पर
हम जैसा चाहते हैं, वैसा ही हर बार किया जाएगा

खुद से मिलना, भूल गए हैं वो लोग भी
जिनका ज़माने में, सत्कार किया जाएगा

बेपर्दा होकर निकला था, आज फिर चाँद
उसे खबर थी, उसका दीदार किया जाएगा

वो एक बार क्या मुस्कुराए, ज़मानेभर ने की हमारी बात
सुना है, इस किस्से को, पूरा अखबार किया जाएगा

गरज़, जब हिमालय पहुंचेगी पीयूष
उस रोज़, हमसे जमकर, प्यार किया जाएगा

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Piyush Sharma 6 JUN AT 23:24

अच्छा चलो, कुछ बात करते हैं
कुछ तो सनम, आज रात करते हैं

मैंने निकाल ली है कलम, तुम भी थोड़े संवर लो
ख़्वाबों में मुलाकात करते हैं

अब ये बात, कौन तुम्हें समझाए
कितने मजबूर, हमें जज़्बात करते हैं

एक अरसे से गुम हैं जनाब, कोई खबर नहीं है
आजकल तो, ऐसा सुलूक, वो मेरे साथ करते हैं

तुम होते, तो बात ही कुछ और होती
मुमकिन हो तो कहो, ऐसे कुछ हालात करते हैं

बाद में बात करने का बोलकर, काफूर हुए वो
झूठ बोलने में तो, वो सबको मात करते हैं

अब, जब खोने को, कुछ नहीं है
दिल कहता है, किस्मत से, दो-दो हाथ करते हैं

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