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Piyush Sharma (Piyush)

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Piyush Sharma 15 HOURS AGO

वैसे तो, साथ हमारे हर दम होते हैं
होता है जहाँ ज़िक्र तुम्हारा, वहां हम होते है

संभल कर निकला करो घर से, फरवरी के महीने में
सुना है, ये आशिक़ों के मौसम होते हैं

सुनो, यूँ रोज़ रोज़ याद न आया करो
मोहब्बत के अलावा, और भी तो ग़म होते हैं

जब कोई मातृभाषा में बोले, तो इज़्ज़त बख्शें
ज़मीन से जुड़े रहने वाले, सरफिरे कम होते हैं

इन परिंदों की तरह, उड़ने की कोई वजह ढूंढो
उड़ते वही हैं, जिनके हौसलों में दम होते हैं

सजा कर, ईमानदारी, ज़माने को ना परोसो
ये दुनियावाले, बड़े निर्मम होते हैं

रास नहीं आती कभी, शर्म की बात
कुछ लोग, बहुत ही बेशर्म होते हैं

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Piyush Sharma YESTERDAY AT 21:05

दिल की बातें कौन सुने
कौन अब नए सपने बने
सोच नहीं था, सच में मुझे भुला दोगे
अब इस पर तुम जवाब भी क्या दोगे
सख्त बात, नरम लहज़े में कहता हूँ
तुम ढूंढ न सको जहां, आजकल वहां रहता हूँ

ज़माने की आँखों में आँख डाली है
मैंने बीते पर राख डाली है
ज़िन्दगी की जंग के लिए तैयार हूँ
मैं खुद में एक हथियार हूँ
सख्त बात, नरम लहज़े में कहता हूँ
तुम ढूंढ न सको जहां, आजकल वहां रहता हूँ

कभी मौसिकी अपनाई, कभी सुखनवारी
मैं बदलता रहा, अपनी कारीगरी
नित नए पैंतरे अपनाता हूँ
खुद को जीने का सलीका सिखाता हूँ
सख्त बात, नरम लहज़े में कहता हूँ
तुम ढूंढ न सको जहां, आजकल वहां रहता हूँ

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Piyush Sharma 19 FEB AT 21:39

सफर लंबा था, तो दूर हो गया मैं
वक़्त के आगे, ज़रा सा मजबूर हो गया मैं
कपूर की गोली की सा था, जीवन में तुम्हारे
अभी यहीं था, अभी काफूर हो गया मैं
हर तरफ मानो, तसादुम हो गया है
एक दश्त में, घर कहीं गुम हो गया है

तुम्हारे झूठ के आगे हार गया, सच मेरा
बेमौत ही मार गया, सच मेरा
बोलता रहा, बेबाक अंदाज़ में
कभी कभी तो इसके भी पर गया, सच मेरा
हर तरफ मानो, तसादुम हो गया है
एक दश्त में, घर कहीं गुम हो गया है

घड़ी थी जो आसान, मुश्किल हुई
अपने पराए की पहचान, मुश्किल हुई
किस्सा मेरा रहा, तुम्हारे ही इर्दगिर्द
मेरी तो खुदकी दास्तान, मुश्किल हुई
हर तरफ मानो, तसादुम हो गया है
एक दश्त में, घर कहीं गुम हो गया है

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Piyush Sharma 18 FEB AT 21:08

प्यार का दीपक जलता रहे
सिलसिला, मुलाकातों का चलता रहे

फिरसे खुलकर मिल, दौड़ कर आ, गले लगा
ज़माना जले, तो जलता रहे

ज़िंदा रखो, इतना तो खुद में मुझको
मन मचलना चाहे, तो मचलता रहे

बस इतना ही पिला, आशिक़ को अपने
वक़्त पड़ने पर, वो संभलता रहे

आँखों को अपनी दो, इतनी तो आज़ादी
पलकों तले, एक ख़्वाब तो पलता रहे

है तकदीर में तेरी, कांटा ही बनाना
तो ऐसा बन, की दुश्मनों को खलता रहे

किस उलझन में उलझे हो, उजाले अंधेरे की
सूरज नहीं तो ना सही, जुगनू तो जलता रहे

नज़र न हटने पाए, मंज़िल से अपनी
दिन चाहे, उगता या ढलता रहे

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Piyush Sharma 17 FEB AT 23:26

ये, गली, मोहल्ले, प्रान्त रहने दो
इंसानों को जो बांटे, वो सिद्धांत रहने दो

अपने में ही कहीं, फंसा रह जाऊं
ऐसा, कोई भ्रांत रहने दो

है मचा, कोलाहल, हर तरफ
मन को, ज़रा सुशांत रहने दो

भीड़ नहीं बनना है मुझको
बस, ये एकांत रहने दो

जितना लंबा, रहा है दिन
उतनी ही लंबी, रात रहने दो

माँ, मुझे बाहों में भर लो
थोड़ी देर के लिए, सब शांत रहने दो

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Piyush Sharma 15 FEB AT 22:30

आँसू, गुस्से में जल रहे है
रगों में, खून उबल रहें हैं
ज़िन्दगी, फुरसत तो दे ज़रा
चालीस सूरज, एक साथ ढल रहे हैं
इन चालीस का, हिसाब लेंगे
हम, मुहतोड़ जवाब देंगे

सोचके दिल घबराता है
बोलने वालों का क्या जाता है
हूँ बैठा, वक़्त के इंतज़ार में
सुना है, वक़्त सबका आता है
इन चालीस का, हिसाब लेंगे
हम, मुहतोड़ जवाब देंगे

अब भी, लब खामोश कैसे रहे
ठंडा, अब जोश कैसे रहे
मुमकिन ही नहीं, खुद को समझना
काबू में, ये रोष कैसे रहे
इन चालीस का, हिसाब लेंगे
हम, मुहतोड़ जवाब देंगे

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Piyush Sharma 14 FEB AT 23:11

ज़िन्दगी की, सिर्फ एक चाहत है, कह दूँ क्या
मुझे तुमसे मोहब्बत है, कह दूँ क्या

मंज़िल तक पहुंच कर, रास्ता भूल जाता हूँ
ये कैसी किस्मत है, कह दूँ क्या

यूँ तो कट रही है, ठीक ठाक अपनी भी
मगर, तेरी कितनी ज़रूरत है, कह दूँ क्या

हमें दिखलाते हैं, वक़्त का तक़ाज़ा
किस-किस के लिए फुरसत है, कह दूँ क्या

लोग कहते हैं, आज बहुत तन्हा हूँ मैं
इस तन्हाई में, क्या राहत है, कह दूँ क्या

ज़माना ढूंढता है अपना नाम, मेरी तहरीर में
ये कैसी हरकत है, कह दूँ क्या

सूरज को आँखें दिखाते हैं, ये नए नवेले चिराग
इनकी क्या हैसियत है, कह दूँ क्या

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Piyush Sharma 13 FEB AT 21:55

दो होठों ने मिलकर, इज़हार किया है
प्यार का दिन है, प्यार किया है

अरसे से काट रहा था, गलियों के चक्कर
एक घुटने पर बैठ, आज इज़हार किया है

सोचने का समय मांग, पलट गई वो
नकद को, देखते-देखते, उधार किया है

कपकपाते लबों से, निकला जवाब
सीधे शब्दों में, उसने इनकार किया है

कितने मजबूर थे, वो झूठे अल्फ़ाज़
आँखों ने बेबाक होकर, सब स्वीकार किया है

मुद्दतों बाद जुटाई, हिम्मत उसने
खुलकर, आज इक़रार किया है

ये इश्क़ करने वालों की, ताक़त नहीं तो क्या है
एक मामूली से दिन को, बड़ा सा त्योहार किया है

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Piyush Sharma 12 FEB AT 23:50

ये मेलजोल, फ़क़त व्यापार है क्या
उनसे कहो, हमसे पूछो, प्यार है क्या

वो जादू की झप्पी, सही गलत में फंस गई
सोचते हैं, हमें अब भी अधिकार है क्या

निवेश की ये, ज़िन्दगी उन में
कह दो, ये सब, बेकार है क्या

नहीं मिलता अब, कोई पैगाम उनका
ये कोई नए तौर का, इतवार है क्या

होती है इस पर, हर तरह की ख़बर
चेहरा तुम्हारा, कोई अख़बार है क्या

जब देखूँ तुम्हारी आँखें, खो जाता हूँ
ये अपने आप में, एक संसार है क्या

सौंपा है तुमको, इस रिश्ते का हर फैसला
सोचो, हम सा कोई दिलदार है क्या

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Piyush Sharma 11 FEB AT 22:44

आज़ाद परिंदों को, कैद न कराया करो
ये क़सीदे-वासिदे, हमसे न पढ़ाया करो

वादा किसी से करिए, सिर्फ नाम के वास्ते नहीं
वादा करो, तो निभाया करो

समय की बात सुनिए, समय की बात करनेवालों
कुछ समय तो, अपनों के संग बिताया करो

बड़ी आशा भरी होती है, बच्चों की नज़र
खाली हाथ, कभी घर न जाया करो

फिक्र में रहते हैं दिनभर, माँ पापा, घर पर
जब भी देखो उन्हें, मुस्कुराया करो

वो जीवन संगिनी, तुम पर पूरा हक़ रखती है
लड़ाई टालने के लिए कभी, झुक भी जाया करो

जब, यूँ शाम उतरती है दिल में
कदम, मयकदे की ओर न बढ़ाया करो

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