Piyush Sharma   (Piyush)
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Joined 2 April 2017


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Joined 2 April 2017
Piyush Sharma 15 HOURS AGO

पूर्णिमा का चाँद, चमका है आसमान में
एक धुंधली सी याद, खड़ी है इम्तिहान में

घावों को, नाखून से कुरेदा जा रहा है
इंसानियत बची ही नहीं, अब इंसान में

तुम कहाँ, इन पचड़ों में आ गए
क्या फर्क रह गया, तुममें और शैतान में

नाव है मंझधार में, फंसी थी किसीकी
और होता रहा, हर घड़ी परेशान मैं

सुना है, होती है दिल की मरम्मत ज़माने में
क्या ऐसी कोई जगह है, तुम्हारे पहचान में

हौसले की मिसाल, कुछ यूँ पायी मैंने
एक शक़्स, डटकर खड़ा था तूफान में

वक़्त युद्ध का, पूछ कर नहीं आएगा
तुम चढ़ा कर रखो, तीर कमान में

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Piyush Sharma YESTERDAY AT 23:33

इन आँखों में कुछ नहीं, क़रार है बस
मेरे पास और क्या है, प्यार है बस

अब किसी से उलझने का, दिल ही नहीं करता
लोग बदले नहीं है, ये ही अपना मेयार है बस

ज़िंदगी तुझसे, अब कोई गिला नहीं
जो होना है, उसीका इंतजार है बस

सोचे समझे नहीं होंगे, अब ज़िंदगी के फैसले
ये निर्णय मेरा नहीं, वक़्त की पुकार है बस

ज्ञान क्या है, है सबकी अलग परिभाषा
मैं कहूँ, जानकारियों का संसार है बस

हर बात का यहां, कैसे किया जाए तब्सिरा
तुम तो इतना समझो, ये सब बेकार है बस

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Piyush Sharma 12 OCT AT 23:45

मैं क्या जानू, किसे डराती है दुनिया
तुम साथ हो तो, मुझे भाती है दुनिया

मैं भी चाहूँ, हर शाम तुम्हारे साथ गुज़ारूँ
और नाम तुम्हारा लेकर, मुझे चिढ़ाती है दुनिया

मिजाज़ लोगों का यार, कभी समझ ही नहीं आया
जाने क्यों रूठती है, क्यों मुस्कुराती है दुनिया

दुनिया की राय का, कितना होता होगा महत्व
कोई तो वजह होगी, कि वो कहलाती है दुनिया

मत बर्बाद कर खुद को, औरों को रिझाने में
एक वक़्त के बाद, सबकुछ भूल जाती है दुनिया

कुछ देर पहले, मुझसे मुँह छुपा रहे थे सब
मैं कामयाब क्या हुआ, अपना बताती है दुनिया

मेरे दोस्त, दिल छोटा ना कर
तू अकेला नहीं, जिसे सताती है दुनिया

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Piyush Sharma 11 OCT AT 23:53

अब ज़रूरी हो गया है, जो था गैरज़रूरी
मिट ही जाएंगे फासले, खत्म होगी हर दूरी

कोई तो बचाओ मुझे, उनके आँखों के नशे से
बुजुर्गों ने कहा है, आदतें नशे की होती है बुरी

जब वक़्त है ऐसा, कि वो तुमसे न मिल पाए
तुम मिल जाओ ना यार, ऐसी भी क्या मगरूरी

किसे होगा पता, किसने क्या कहा
किसे पता होगी, दास्तान पूरी

मेरे भी हिस्से आयी है, दो तरह की ज़िंदगी
रात भर ख़्वाब बुने, दिन भर की मज़दूरी

ऐसा नहीं है, कि मैं लिखना चाहता हूँ
मगर कुछ करूँ, लिखा ही देती है मजबूरी

अच्छा चलो, अब मुझे जाना होगा
इंतज़ार में है मेरे, कुछ ग़ज़लें अधूरी

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Piyush Sharma 9 OCT AT 23:49

चाहे अल्लाह कहूँ, चाहे राम
हर विपदा के साथी भगवान

बसा-बसाया घर, बिखर जाता है
जो न हो, सच और झूठ की पहचान

सही और ग़लत के, क्या पैमाने जनाब
कैफ़ियत बताती है, कौन कैसा इंसान

ख़्वाब की खिड़कियां खुल गईं
मयख़ाने सज गए, जो ढल गई शाम

बड़ी बेसबरी से, खोला था लिफ़ाफ़ा
उम्मीद थी, महबूब ने लिखा होगा पैग़ाम

अल्फ़ाज़ों की कमी ने, जब-जब घेरा
बेखौफ लिखा किए, बस उनका नाम

बिखरे एहसासों को, देकर आवाज़
कह दी ग़ज़ल, हो गया काम

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Piyush Sharma 8 OCT AT 21:56

वक़्त की पुकार है, राम बन
भोगविलास छोड़, देख अंतरमन
बनना चाहे जब भी, राम कोई
चिंघाड़ उठता है, दशमुख रावण मन
ढूंढने से भी तो नहीं मिलते अब राम
चलायमान है फिर भी, राम का नाम

ख़्याल ये, कहाँ टाले से टलता है
द्वंद राम और रावण का, रोज़ चलता है
हर रोज़, फलता-फूलता है रावण
बस, एक रोज़ जलता है
ढूंढने से भी तो नहीं मिलते अब राम
चलायमान है फिर भी, राम का नाम

हर तरफ, राम की जयजयकार है
मगर ये तो, रावण का संसार है
जाने क्यों, कहे बिन रहा नहीं जाता
माना, यहां कुछ भी कहना बेकार है
ढूंढने से भी तो नहीं मिलते अब राम
चलायमान है फिर भी, राम का नाम

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Piyush Sharma 8 OCT AT 0:22

कैसी उधेड़बुन है, ये कैसा मायाजाल
हर शक़्स नाशाद है, हर शक़्स बेहाल

अपने दिल की, कैसे बताए कोई
कौन समझे यहां दिल का हाल

सागर की गहराई रखना, अपने हौसले में
शक़्ल देख कर भी, बदल जाते हैं ख़्याल

वक़्त ने ही सिखाया होगा, ज़माने को ये हुनर
जो सामने आये, उसी का किया जाए इस्तेमाल

रंजिशें, और कितनी दबाए रखेगा
ले लड़ले मुझसे, आ अपना गुबार निकाल

मैं किसका, और मेरा कौन
मुश्किल बड़ा है, ये आसान सवाल

थक चुके हैं मेरी जान, मेरे भी कंधे
कुछ ज़िम्मेदारियाँ तो तू भी संभाल

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Piyush Sharma 6 OCT AT 23:56

जैसे गुंचा कोई प्यार का
तू गुलदस्ता परिवार का
फलक का महताब जैसे
या आफ़ताब संसार का
मेरा बच्चा, मेरी शान
पहला जन्मदिन, मुबारक मेरी जान

रंग मिट्टी के, तुझे दिखाएगा
कभी विरोध करेगा, कभी अपनाएगा
तू बस हौसला रखकर, कर्म करना
एक रोज़, खुदबखुद जीत जाएगा
होंगे तेरे ही कर्म, तेरी पहचान
पहला जन्मदिन, मुबारक मेरी जान

सफलता का रस पी
मेरे बेटे, खुल कर जी
जो करना है, कर
रच, नई गाथा इतिहास की
लगा छलांग, चीर दे आसमान
पहला जन्मदिन, मुबारक मेरी जान

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Piyush Sharma 5 OCT AT 23:58

क्या हुआ, जो मुसीबतों का अंबार है
ज़िन्दगी, तेरी हर चुनैती स्वीकार है

कुछ कमी हममें ही थी, भरोसा ख़ुद पर न किया
हैं हाथ मेरे, कवच मेरा, मेरी सोच, मेरा औज़ार है

दुनिया एक हक़ीक़त है, या केवल कहानी कोई
मानो तो हैं हम हस्ती कोई, या सिर्फ एक किरदार हैं

दोहरी ज़िन्दगी जी रहा है, हर शक़्स यहां
एक सम्त है कद्र उसकी, दूजी सम्त बेज़ार है

बिकने लगी है, हर चीज़ ज़माने की
हर तरफ, नज़र आता कोई बाजार है

कभी होता है यकीन, अपनी हर कोशिश पर
कभी एहसास होता है, सबकुछ बेकार है

सोचता हूँ, किस हद्द तक, कर सकता हूँ बात
तुम ख़ुद ही बता दो यार, मेरा कितना अधिकार है

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Piyush Sharma 4 OCT AT 23:57

हमें अब कुछ भी बोल पाने की, आदत न रही
हमने सजदा न किया, कि इबादत, इबादत न रही

है समय बड़ा बलवान, ये प्यार को भी हरा दे
हमारी अपनी ज़मीन पर, हमारी हुकुमत न रही

चुभ जाती हैं आजकल, छोटी-छोटी सी बातें
इश्क़ की बात में, इश्क़वाली लज़्ज़त न रही

बहुत संभल कर निकलते हैं, अल्फ़ाज़ उसके
उस लड़की की आँखों में, अब शरारत न रही

कौन देख सकता था, ये मंज़र जानी
हम दोनों के दरमियान, वैसी कुर्बत न रही

एक नाम, उसका लिख कर, हम लिखना भूल गए
लोग अब भी कहते हैं, दुनिया में मोहब्बत न रही

क्या तकलुफ करें अब, ये कहने में भी
आज ज़माने में, ज़रा भी शराफत न रही

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