पीयूष मिश्रा   (Piyush Mishra)
7.3k Followers · 83 Following

यायावर The Wandering Poet
Joined 9 October 2016


यायावर The Wandering Poet
Joined 9 October 2016

तीन साल की हो गई बिल्ली
बोली स्कूल में जाऊँ
बीच राह में मिल गया कुत्ता
बोला भाऊँ भाऊँ
स्कूल में सारे बोले "मे आई कम इन मैडम?"
बिल्ली दरवाज़े से बोली "मैडमजी मैं-आऊँ?"
"मैं-आऊँ?" "म्याऊं म्याऊं म्याऊं!"

-


103 likes · 9 comments

2 अक्टूबर और गांधीजी की प्रासंगिकता
——–————————————

इस देश में गांधीजी को लेकर कई खेमे हैं।
एक खेमा वो है जो 2 अक्टूबर हो या 30 जनवरी, बात-बेबात बस एक ही बात कहता रहता है- "गांधीजी की हत्या आरएसएस ने की"

दूसरा खेमा उसी आरएसएस के प्रचारक रहे वर्तमान प्रधानमंत्री और उनके आस-पास के लोगों का है जो भाषण, टीवी, ट्विटर, फेसबुक पर एक ही बात कहीं भी घुसेड़ देता है- "गांधीजी ने कहा था।"

तीसरे खेमे में ऊपर वाले दोनों के समर्थक हैं जिनके लिए 2 अक्टूबर से अधिक महत्व 1 अक्टूबर का है जिस दिन वो व्हाट्सऐप, फेसबुक और ट्विटर पर गांधीजी की फोटो के साथ एक ही लाईन चिपकाते चलते हैं - "स्टॉक भर लो, कल ठेका बंद रहेगा"

-


2 अक्टूबर और गाँधी जी की प्रासंगिकता

#yayawar #yqbaba #yqdidi

81 likes

जाने कितनी ही इच्छाएँ
दफ़्न हो गयीं मन के अंदर
और उदासी की इक कोंपल
उग आयी है उसके ऊपर

-


103 likes · 3 comments · 4 shares

इंद्रधनुष के सारे रंग मिला कर उसने
मुझे दिखाया सादा दिल ऐसा होता है

-


128 likes · 6 comments · 5 shares

....

-


133 likes · 42 comments · 9 shares

पहले मुझको ख़ुदा किया
फिर बुत मुझको बना दिया

-


183 likes · 14 comments · 5 shares

सब रस्ते घर को जाते हैं
तो कैसे घर खो जाते हैं

दिन को चमकें सूरज से हम
शाम को दरिया हो जाते हैं

थक गए सपने पूरे करते
अब हम थोड़ा सो जाते हैं

-


271 likes · 10 comments · 31 shares

जागती आँखों से देखता हूँ सपने
ना जाने कब से मैं सोया नहीं हूँ

हँसता हूँ क्योंकि मैं सब सहता हूँ
अपनी बातें ख़ुद ही से कहता हूँ
उलझ कर मैं ख़ुद से ही रह गया हूँ
तड़पता हूँ कब से मैं सोया नहीं हूँ

राह नहीं है पर मैं चलता हूँ
बेमंज़िल ही रोज़ निकलता हूँ
कभी तो ख़त्म होगा सफ़र ये
भटका हूँ अक्सर मैं खोया नहीं हूँ

लम्बी है रात कि सूरज नहीं आता
ठहरा हूँ मैं कि ये पल ही नहीं जाता
जागती आँखों से देखता हूँ सपने
ना जाने कब से मैं सोया नहीं हूँ

-


ना जाने कब से

#safar #tanha #yayawar #yqdidi #yqbaba

243 likes · 13 comments · 39 shares

================================

एक घने जंगल में
सूरज की रोशनी भी जहाँ पहुँचती नहीं
अँधेरा ऐसा
कि तारे भी झाँक सकते नहीं
हवा को रास्ता नहीं सूझता
लगातार बोलते झींगुर थक कर गूँगे होने की दुआ माँगते हैं
वहाँ अनंत काल से टिमटिमाते रहना
तुम्हें कैसा लगता है उदासी?

-


Show more
221 likes · 16 comments · 3 shares


Ladke

Show more
364 likes · 18 comments · 21 shares · 769 Views

Fetching पीयूष मिश्रा Quotes

YQ_Launcher Write your own quotes on YourQuote app
Open App