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पीयूष मिश्रा (Piyush Mishra)

यायावर The Wandering Poet
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पीयूष मिश्रा 22 NOV AT 11:47


Ladke

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पीयूष मिश्रा 28 OCT AT 13:56

कल यानी 29 october को मिलिए मुझसे सारे दिन, YQ के insta stories में। एक writer और copywriter के रूप में मेरा एक दिन और बहुत सारा fun

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पीयूष मिश्रा 5 SEP AT 13:20

दाग़ अच्छे हैं
(read in caption)

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पीयूष मिश्रा 19 AUG AT 11:41

कहता हूँ एक बात
आज की रात
जानम! हो सके तो सोना मत
सुन सको गर बात मेरी
है छुपी जो बात में
जानम!हो सके तो रोना मत

ऐसी ही एक रात
कह रहा था जब मैं तुमसे ऐसी ही एक बात
एक बूँद टपक पड़ी थी
हथेली पर मेरे
जो आयी थी आँख से तुम्हारे
आज तक माफ़ नहीं कर पाया हूँ मैं
उस पल, उस बूँद के लिए,
अपने आप को

सच कहूँ?
कह नहीं पाया हूँ अब तक
जो सोचता हूँ मैं
और जो कह गया अभी
सोचा नहीं था कभी

और जब कहने चला तो
आज फिर से सो गया तू
ख़्वाब में फिर खो गया तू
रह गया मैं
अधूरी बात
पूरी रात!!

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अधूरी बात पूरी रात

(बच्चन को पढ़ते हुए)

#yayawar #yqbaba #yqdidi

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पीयूष मिश्रा 11 AUG AT 12:02

'Bahar' mein nahin hai!





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पीयूष मिश्रा 9 AUG AT 17:27

कुछ ऐसे मुझसे वो मिल रही है
कि जैसे मुझको भुला चुकी है

ये दिल है कोई हवेली जिसकी
चमक-दमक में वीरानगी है

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पीयूष मिश्रा 3 AUG AT 9:51

सूरज कह रहा है विदा
दरिया के पाँव पर माथा टेके शाम पड़ी है
अम्बर फिर से लाल से नीला और फिर काला पड़ जाएगा-
ज़ख़्म के जैसे

दीवारों से घिरा हुआ मैं
एक दरवाज़ा ढूंढ रहा हूँ - दीवारों में

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एक दरवाज़ा ढूंढ रहा हूँ

#door #goodbye #yayawar #yqbaba #yqdidi

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पीयूष मिश्रा 29 JUL AT 14:05

दोनों ही भाग रहे थे
दुनिया से
एक दूसरे से
और ख़ुद से।
दोनों ही छुपा रहे थे प्रेम
दुनिया से
और एक-दूसरे से।
प्रेम- जो उन्हें बहुत पहले हो जाना चाहिए था
जब वो किसी अजनबी रिश्ते में बंधे नहीं थे
मगर तब वो मिले नहीं थे

वो उससे सुनना नहीं चाहती थी-
"तुम्हारी आँखों में डूब कर मर जाना चाहता हूँ मैं"
वो जानती थी- वो जीना चाहता है-मरना तो बस आदत है उसकी
वो कभी कहता नहीं था उससे
"आओ एक नज़्म सुना कर सुला दूँ तुम्हें"
वो जानता है- वो सोना चाहती तो रोज़ शाम ढलते ही वापस घर नहीं लौटती।

वो दोनों एक दूसरे से बात करना चाहते थे
मगर चुप रहते थे
दोनों छुपा रहे थे प्रेम
दुनिया से
और एक-दूसरे से।

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और एक दिन हो जाना प्रेम का

#love #random #yayawar #yqbaba #yqdidi

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पीयूष मिश्रा 21 JUL AT 12:08

सुनो लड़की!
क्या अब भी डायरी में छिपा कर फूल रखती हो?
चलती राह आ जाए कोई पीपल तो सर को ढँकती हो?
कोई बच्चा जो दिख जाए मांगता भीख सड़कों पर तो रिक्शे से उतर जाती हो क्या?
लगा कर हेडफोन कानों पर अब भी गीत गाती हो क्या?
तुम्हारी रात का सपना कोई सुनता है तुमसे अब?
जो रोती हो कभी तुम तो कोई अब गुदगुदाता है?
कोई लिखता है ख़त तुमको बहुत तुम याद आती हो?
मैं तुमको याद हूँ क्या लड़की?

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पीयूष मिश्रा 16 JUL AT 21:23


Charkha

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