Pawan Goyel   (💕पवन गोयल 💕)
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Joined 16 April 2018


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Joined 16 April 2018
Pawan Goyel 12 HOURS AGO

आज का विचार

जब परीक्षा के समय ही फेल हो गए
तो तैयारी कैसी थी

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Pawan Goyel YESTERDAY AT 14:54

अपने जन्मदिन पर कम से कम
एक पौधा अवश्य लगाएं

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Pawan Goyel YESTERDAY AT 10:04

प्रकृति का कण-कण इन निर्दोष जीवों से ही संरक्षित है
आयुर्वेद का सबसे बड़ा ज्ञान भारत के ऋषियों ने जीवों से ही पाया था ।
इंसान को इंसानियत का पाठ जीवों ने ही पढ़ाया था। कब उठना है,कब सोना है, क्या हमारे खाने लायक है क्या हमारे खाने लायक नहीं है ये सब इंसान ने जीवों से ही सीखा है। इंसान दौलत पाकर ना जाने अपने को क्या समझ बैठा है वरना हर गतिविधि में इंसान जीवो से पीछे ही है।आज इंसान ऐसे ऐसे खाद्य पदार्थों का सेवन कर रहा है जिनको जीव सूंघना तक पसंद नहीं करते। कोई जीव नशा नहीं करता।कभी सोचा बर्बादी की तरफ कौन है जीव अथवा इंसान।इसी प्रकार इंसान चाहे तो जीवों से बहुत कुछ सीख सकता है।परंतु उसे अपने मनोरंजन के सिवाय कुछ सूझता ही कहाँ है।आज मानव जगत जीवों के एहसान के बजाय दरिंदगी पर उतर आया है कभी किसी कुत्ते के बच्चे को आग में जलाकर उसके मांस को खाकर अपना मनोरंजन करता है कहीं किसी गर्भवती हथनी को बारूद से भरा अनानास खिला कर।आज भी जीव इंसान से ज्यादा समझदार है अपने मनोरंजन के लिए किसी जीव अथवा इंसान का शिकार नहीं करते। वैसे तो इंसान ने काफी तरक्की कर ली परंतु संस्कारों में जीवों से पीछे ही रह गया। आपने देखा ही होगा कि संसार में सबसे ज्यादा दुखी सिर्फ इंसान ही है अगर जीव दुखी भी हैं तो सिर्फ और सिर्फ इंसान के कारण। आइए सब मिलकर जीव जगत से अपने बच्चों की भांति प्यार करना सीखें।

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Pawan Goyel YESTERDAY AT 7:40

आज का विचार

ए चलने वाले जरा ध्यान दें चल
हर चीज में ईश्वर का वास है

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Pawan Goyel 4 JUN AT 14:29

आंँख मिचोली खेलते ये नैना मदहोश

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Pawan Goyel 4 JUN AT 13:59

पंचतत्व से रचा जहान
जल अग्नि वायु धरती आसमान
जल ने अपने पांँच भाग किए
अग्नि वायु धरती आसमान को एक-एक दिए
हर तत्व में जल से हर पल है
जल है तो कल है

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Pawan Goyel 3 JUN AT 14:36

ए दोस्त
मैं फूल तुम खुश्बू हो
मैं सोना तुम कंगन
मैं फल तुम मिठास उसकी
मैं धरा तुम आंगन

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Pawan Goyel 3 JUN AT 12:53

खो गए हो कहांँ इन बरसती शबनम की बूंँदों में
ज़रा इन अधरों की नज़ाकत को भी निहारो
ये बेकरार है कबसे उल्फत के जाम को
ना दो सजा इन्हें कुछ इन्हें भी संँवारो

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Pawan Goyel 3 JUN AT 9:43

मैं
एक बूंँद बन
उपजी धरा पर
पर्वतों की गोद से
निकल पड़ी
संग धारा के
पनपते संयोग से
कभी लहर
कभी नदी
कभी सागर कहलाई
ज्यों सिमटी
अस्तित्व में अपने
बनी बूंद फिर संयोग से
ना जाना ना पहचाना
मैं कौन और क्या लक्ष्य मेरा
दूर हूंँ अभी तक
ऐसे किसी प्रयोग से

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Pawan Goyel 3 JUN AT 6:45

आज का विचार

मन के अच्छे बुरे विचार सिर्फ बीज की भांति हैं
जो जीवन में बौ दिया उसी का फल काटोगे

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