Pankh , My thought's ✍️   (Khawahishon ke "Pankh")
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Joined 5 January 2020


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गुजारिशें
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छाया ये कैसा है अंधेरा
जल रहा उम्मीदों का है दिया
पर रोशनी तो जैसे छिप सी गई है
नजर ना आए चांद का भी टुकड़ा
पूरी हो जाए कुछ तो ख्वाहिशें
की रब से ना जाने की कितनी
गुजारिशें
पर मेरी सुनता ना अब रब मेरा

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कभी कभी
जिंदगी ऐसे मोड़
मे खड़ी
नजर आती है
जब
खामोशियां
और
तन्हाईयां
जिंदगी का हिस्सा
ना रहकर
जिंदगी बन जाती
है

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कभी - कभी अच्छा लगता है
खुद के साथ समय बिताना
या
आप कह सकते है
खुद से ही बातें करना

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जिसे आप पा ना सकते हो
पर आप जब नजरे उठाओ
तो आपको इस बात का यकीन हो
की आप अकेले नही हो
कोई है जो आपके साथ है

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Chahe paas na ho
Phir bhi zindgi ke
Har mod par saath ho
Aisa hi rishta saccha
Rishta hota hai
Phir chahe woh rishta khoon Ka ho
Ya
Dil se juda ho
Fark kya padta hai

-



वक़्त सबका कहां बदलता है

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ऐसे
जिनमें जिंदगी को हम ढाल सकें

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मेरी खामोशियों की भाषा
को तेरी खामोशियां
पढ़ना जाने है
एहसास चाहे जैसे हो
रूह को रूह
ही पहचाने है

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