18 MAY 2020 AT 12:44

देखूं मै खुद को जब - जब
आइने मे
मैं अक्स तेरा ही पाती हूं
तेरी एक प्रेम की बूंद पाने कि खातिर
मै तृष्णा सी बन जाती हूं
मैं राधा नही मै मीरा नही
ना मै कोई गोपी तेरी
ना ही मै कोई तेरी सखी
तेरी एक झलक पाते ही कान्हा
मै अपनी सुध - बुध खो सी जाती हूं
मै तेरी नही हूं पर तू मेरा है
तुझ पर कोई हक ना होते हुए भी
केशव तुझ पर अपना हक मै जतलाती हूं
तेरे मुकुट का मोरपंख मै
अपने सिरहाने सजाती हूं
जानती हूं तेरी बंसी की धुन ना मेरे लिए
फिर भी उसे सुन मै बांवरी सी हो जाती हूं
हो सकता है तू अंजान हो मुझसे
पर मै तुझको खुद मे ही कहीं पाती हूं
तेरी मोहक छवि देख मोहन
मै तेरी दीवानी सी हो जाती हूं

- Khawahishon ke "Pankh"