मैं चाहूं हरदम
दिन हो या रात
फिर काहे का गम
और कैसी दुख की बात
जो मिल जाएं हमसब एक साथ
कोई हमें छू भी सके फिर भला
ऐसी किसमें है औकात!
- Goutam Nitesh
6 AUG 2023 AT 17:28
मैं चाहूं हरदम
दिन हो या रात
फिर काहे का गम
और कैसी दुख की बात
जो मिल जाएं हमसब एक साथ
कोई हमें छू भी सके फिर भला
ऐसी किसमें है औकात!
- Goutam Nitesh