मुझसे दूर चला गया है वो एक अरसे से।
फिर से क़रीब आने को ग़ज़ल कहते हैं।।
मेरे इस दिल की गहराइयों में जो कुछ है।
उसे ठीक से पढ़ पाने को ग़ज़ल कहते हैं।।
वो यूँ तो बहुत दौड़ रहा है ज़माने के साथ।
'नीर' के साथ आने को ग़ज़ल कहते हैं।।
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© निरंजन 'नीर' 15 Sept-
सुनो ना...
तुम हवा की मानिन्द
साँसों में शामिल हो।
वो पूछते हैं मुझे
तुम जरूरी क्यों हो?
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दुआ भी दी और दिल को रोग दिया।
एक अल्हड़ सी उम्र को जोग दिया।।
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महक तुझमें तेरे ही गुलों की आयेगी !
फूल तेरे दिल के बाग़ में ताज़ा हैं ना ?
ज़िक्र उसका ना कर, तू तो अपनी सुना !
उसके तिल से तेरा नसीब वाबस्ता है ना ?
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03/09/2016-
आसमां साफ है, नीयत नहीं उसकी।
वो बरसता भी है, तो ज़मीन देख के।।
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03 Sept-
वो झगड़ते बहुत हैं,
बहुत प्यार होगा।
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© Copyright,
16 August-
क्या जताते हो, क्या छुपाते हो ज़नाब।
आपके असली वज़ूद पर पड़ा है नक़ाब।
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© Copyright 30 June-
हर बात पर अशआर निकलने लगते हैं,
इश्क़ और रूहदारी में पड़ जाने के बाद।
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© Copyright, 21 June-
सागर की तरह तुम उठा
लो ना अपनी लहरें।
ले लो ना मुझे अपनी आग़ोश में।
ना तुम रहो अपनी सुध बुध में
और ना मैं रहूँ अपने होश में।।
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© Copyright 15 June-
सौंधी सी खुशबू उड़ा के लाई है।
बारिश की पहली फुहार आई है।।
मैं तो दूर ही से महसूस कर लूंगा।
जब भी तर हुआ तेरी याद आई है।।
तू नहीं है पर कोई तो भीगा होगा।
मैं हूँ पर भीतर में मेरे तन्हाई है।।
सौंधी सी खुशबू उड़ा के लाई है।
बारिश की पहली फुहार आई है।।
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© Copyright, 13 June-