Nirja Sharma  
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Joined 2 February 2019


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Joined 2 February 2019
Nirja Sharma 8 MAY AT 13:32

लम्बे इंतज़ार के बाद,समय की घडी उस पल को पास ला रही है
सम्भावनाओं में घिरी मन की नाव,लहरों में फँसी जा रही है

दिल और दिमाग ऐसे में कभी हाथ नहीं मिलाते
अपना समझने वाले भी फिर कहाँ साथ निभाते

हर चीज सँभालना इतना आसान तो नहीं
जिम्मेदारी कंधो पर है कोई मजाक तो नहीं
सबको खुश रखना कितना कठिन सा है
ड़ट कर खड़े रहना जरा मुश्किल सा है

सपनों का पहरेदार भी छुट्टी पर चला गया है
तो नींद भी जैसे कहीं गुम हो गयी है
करवट बदलते यूँही रात गुज़र जाती है
एक नया सवेरा आता है
फिर शाम ढ़ल जाती है

मिल जाये तुम्हें जो मेरी शांती कहीं
भटकती हुई को राह दिखा देना मुझ तक सही
आगोश में उसके थोड़ा सो जाना चाहती हूँ
उलझनों को भुला कर थोड़ा खो जाना चाहती हूँ

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Nirja Sharma 2 MAY AT 21:02

His hairs were silky
like way of milky
shiny and black
smooth and stack

People use to wow
My heart feels low

Today
He got bald
not by choice
but by fate

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Nirja Sharma 30 APR AT 22:36

घर से निकल चुके हैं
रेल हम पकड़ चुके हैं।
मंज़िल वहीं ले जा रही है
तारीख अब करीब आ रही है।
वो शहर फिर पुकार रहा है
दिल जरा सा फिर घबरा रहा है।

भले ही परेशान चेहरे लिए जायेंगे
मुस्कान को साथ लौटा कर लाएंगे।
एक दूजे का हाथ थामे हम चल पड़े हैं
ऐ-मंज़िल देख हमारे हौसले अब भी खड़े हैं।

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Nirja Sharma 29 APR AT 17:17

आज खूबसूरती,पढाई पर भारी पड़ गयी
वाह रे ज़माने, तेरी कैसी सोच रह गयी

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Nirja Sharma 25 APR AT 22:54

Sometimes we dont want to loose battle
but we have to,for sake of others happiness..

Sometimes we dont want to leave people
but we have to,for sake of someone's peace..

Sometimes we dont want to surrender to situations
but we have to ,to let things flow..

Sometimes we dont want to forget ourselves
but we have to,for sake of finding new in US..

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Nirja Sharma 24 APR AT 17:41

तिनका तिनका जलना यूँही
गिरना सँभलना फिसलना यूँही
कतरा कतरा खुद को मिटा कर
फिर मिट्टी में मिल जाना यूँही

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Nirja Sharma 22 APR AT 12:29

इश्क़ मुकम्मल हुआ ही कितनों का है
इसने हमेशा कुर्बानी ही तो माँगी है।
किसी एक की ख़ुशी के लिए दूजे को झुकाना
इसने हमेशा बस यही तो ठानी है।

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Nirja Sharma 21 APR AT 13:15

सन्नाटा क्यों छाया है
अँधेरा क्यों गहराया है
इत्तेफाक है या सच है शायद
साया भी आज क्यों घबराया है

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Nirja Sharma 20 APR AT 0:17

अपने हिस्से का क़र्ज़ चुकाना अभी बाकी है
बिगडे रिश्तों को सुधारना अभी बाकी है
फूल भरी राहें बन गयीं कँटीली
हर काँटे की चुभन सहना अभी बाकी है
आरम्भ के लिए अंत करना अभी बाकी है

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Nirja Sharma 19 APR AT 14:17

जीवन हर पल ढलती शाम सा है
कभी तेज़ धूप बिखेरता कभी शीतल छाँव सा है

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