Nirja Sharma  
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Joined 2 February 2019


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Nirja Sharma 28 AUG AT 21:28

चले मुझे वहाँ जाना है
जहाँ मेरा ठिकाना है
ये शहर मेरे लिए अब बेगाना है।

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Nirja Sharma 24 AUG AT 12:55

हे कृष्ण!
दे दो वृन्दावन वास मुझे
गोवर्धन गिरधारी का हाथ सर पर
राधे के चरणों की आस मुझे

दूर जो तुमने जन्मभूमि से किया
दुनिया ने भी मुख फेर लिया

लिख दो अब एक ऐसी कथा
हर लो जीवन की हर व्यथा
रोज करूँ दीदार..मेरे जुगल जोड़ी सरकार
बृज रज माथे लगे
बुला लो अपने धाम मुझे
गले लगा लो घनश्याम मुझे

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Nirja Sharma 19 AUG AT 18:35

हर पल एक खौफ सताता है
घटता समय मौत की आहट सुनाता है।

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Nirja Sharma 20 JUL AT 22:27

Sailing close to the harrowing wind
in peer for ravishing shells
covering enticing dreams in it
Hallucinated by the seabed,
i dived down the boat
in crave for feast of pearls

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Nirja Sharma 16 JUL AT 18:36

पैसों के अमीर तो हम कभी न थे ,दिल की अमीरी के चर्चे थे
पर आवाम की नज़रों ने आखिर आज गरीब ठहरा ही दिया
वाह रे ज़माने क्या खूब सिला दिया..

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Nirja Sharma 13 JUL AT 19:52

एक ख्वाब था
पल में टूट गया..
एक रिश्ता था
जो छूट गया..

हाथ से फिसलती रेत ने कहा
वो तेरा नहीं,जो तुझसे रूठ गया..

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Nirja Sharma 8 JUL AT 21:51

कुछ बातें जब दिल के मकान को तबाह कर जाती हैं
संग अपने जीने की नई वजह भी दफ़न कर जाती हैं..

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Nirja Sharma 7 JUL AT 14:33

to face the fears
to not shed tears

to be responsible
to face world,which is cruel

to be strong
to not make things prolong

to flinch from fights
to stand for own rights

to behave pensively
to not imprecate immensely

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Nirja Sharma 6 JUL AT 23:12

उजड़े आँगन को गुलज़ार करना होगा
बिखरे ख्वाबों को फिर समेटना होगा
पतझड़ से बसंत का सफर धरा के लिए भी आसान नहीं
आशाओं के दीप जलाये फिर चलना होगा

नयी उम्मीदों के पंख लगाए फिर उड़ना होगा
गिरना,गिर कर उठाना, फिर से सम्भलना होगा
मुश्किल है डगर ,जीना इतना भी आसान नहीं
हर बाधा को पार कर अब तरना होगा

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Nirja Sharma 4 JUL AT 14:42

गिरते पानी की इन बहारों सा
तुमसे मिलने को दिल तरसता है

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