Nidhi Srivastava   (#निधि_🆆🆁🅸🆃🅴🆂❤️✍️)
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Joined 18 December 2018


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Joined 18 December 2018
Nidhi Srivastava 17 AUG AT 14:30

सुना है,मोहब्बत करने वालों की सुबह अलग और शाम भी अलग है,
मान बैठे हैं खुदा महबूब को,उनकी काएनात भी अलग है!!

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Nidhi Srivastava 15 AUG AT 18:42

मैं चली अगर जो काली रातों में
मन घबराया और राहों से अनजान थी
अंधकार को परास्त कर
तुम 'शशांक' बन गए
दुःख छाए थे जीवन में
तुम सुख का'अरविंद' खिला गए
जीत की जब आस न थी
'संजय' होने की उम्मीद जगा गए
मेरे मन मन्दिर के तुम
स्वयं 'विभुम' बन गए
मेरे उदासीन मन को
तुम 'शोभित' कर गए

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Nidhi Srivastava 14 AUG AT 18:42

||आशाएं जो थीं||

~READ IN CAPTION~
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Nidhi Srivastava 7 AUG AT 22:16

अहम से परे थी , वक्ता महान थी
अटल जी ,मुरली जी का नाज़ थी
एक सुषमा स्वराज थी
भारतीय राजनीति को सुर देने वाली कोई साज थी
सशक्तिकरण हेतु नारियां उनकी मोहताज थी
एक सुषमा स्वराज थी
स्वभाव से खुश मिज़ाज थी
संसद तथा संयुक्त राष्ट्र में भी हिंदी से करती आगाज थी
एक सुषमा स्वराज थी

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Nidhi Srivastava 6 AUG AT 1:03

सच बताना
सच छुपाना

सच कहूँ इन दोनों में फ़र्क है तो केवल आत्मतुष्टि का..!
सच में सच छुपाना क्षण भर का हर्ष देता है
जबकि सच कहूँ तो सच बताना आजीवन
आत्मसन्तोष का अनुभव कराता रहेगा।।
सच्चाई है कि सच हमेसा ही अपना स्थान कायम रखेगा
किंतु अंत में निर्णय हमारा है कि हमें सच को बताकर उसका
क्षेत्र विस्तृत करना है या सच को छुपाकर उसका क्षेत्र सीमित करना है..!
राधे राधे

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Nidhi Srivastava 4 AUG AT 16:26

तुम्हें सुर कहूँ
या साज़ कहूँ
या वीरान चित्त का संगीत कहूँ
तुम्हें प्रीत लिखूं,
या मनमीत लिखूं
या अपनी हासिल की मनभावन जीत लिखूं

कितना भी कहूँ, कितना भी लिखूं
किन्तु इस रिश्ते को शब्दों में बांध न सकूँ

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Nidhi Srivastava 3 AUG AT 23:19

कोई अजनबी इस क़दर फ़रिश्ता बन गया है
यूँ दिल से दिल वाबस्ता हो गया है

मुश्किल-ए-राह में अपनों ने भी साथ छोड़ा था
पर इन दोस्तों की बदौलत सुरभित ये गुलिस्तां हो गया है

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Nidhi Srivastava 2 AUG AT 23:36

मेरी हर कहानी में
❤️तुम हो
तुमसे ही जिंदगी गुलज़ार है

मेरी मौजों की रवानी में
❤️तुम हो
बस तुम्हारा ही एतबार है

आशाओं की निशानी
❤️तुम हो
तुमसे ही मिटता अंधकार है

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Nidhi Srivastava 2 AUG AT 1:40

Somewhere there is Awe on her face
Cause she was alone in that race

She was nostalgic because she is going to leave her people
But for the photos, she was smiling with dimple

She had to leave her place for a new world
Between pleasant and pain , her thoughts were whirled

In the end,With all the mixed feelings she cried
It was hard for her to be a bride

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Nidhi Srivastava 17 JUL AT 22:25

...आशा थी
तुम फिर आओगी
उषा मनोरम फिर लाओगी
धैर्यशून्य को नियमित करोगी
निस्तब्ध हृदय की ओज बनोगी
मन चंचल यूँही डोल गया
कुछ भाव नवेला जाग गया
ना तुम आई ना आभा लाई
फिर जीवन मे कालिमा छाई..!

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