Navneet Srivastav   (Navneet Srivastav {Navu})
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Joined 13 December 2019


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7 JUN AT 19:08

हम जिन्हें पा नहीं सकते कभी इस जिंदगी में;
ना जाने क्यों उन्हें ही खोने से डरते रहते हैं ताउम्र

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3 JUN AT 11:06

हम मोहब्बत समझ कर बहुत दूर तलक गए पीछे उसके
एक मोड़ पर देखा रुक के तो मोहब्बत बेवफ़ा निकली

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2 JUN AT 10:37

हमने जाने पे उसके बस इतना जाना है
के कभी कुछ मुकम्मल ठहरता नहीं है

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1 JUN AT 11:38

यूँ तो कई मर्तबा भरी महफ़िल में जिक्र आया उसका
एक कहानी याद आई, इक किस्सा याद आया उसका

भुलाने में जिसको एक अर्से से बैठे रहे हम ख़ल्वत में;
जो खत देखा पुराना तो वादों से मुकरना याद आया उसका

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31 MAY AT 10:52

एक तन्हाई की उम्र गुजरी, थोड़ा सा सुकूँ पाया;
रात को चाँद देखा तो फिर शब-ए-फ़ुर्क़त याद आया

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27 MAY AT 9:31

हमने हर बार बस इक यही खता की है
जफ़ा करने वालों से वफ़ा हर मर्तबा की है

दिल को तबाह करने का हुनर हमसे पूछो;
वो ना मिलेगा जानते हुए भी दिल्लगी की है

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24 MAY AT 15:01

अपने वुजूद को मिटाने की हसरत हो जब कभी;
ख़्याल मोहब्बत का इक मर्तबा ज़ेहन में ला कर देखो

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19 MAY AT 11:53

वो जो शख़्स प्यार में हारा होगा
किसी की जफ़ा का मारा होगा

इश्क़ में साथ नहीं मिलता ताउम्र;
उसने हयात को तन्हा ही गुजारा होगा

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18 MAY AT 8:39

भुलाने को जो बैठे हम उसे, उसकी यादों, उसकी बातों को;
कुछ घड़ी बाद हम अपनी तलाश में निकले भूल के वुजूद अपना

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18 MAY AT 7:52

तेरे दीद की ख़्वाहिश लेकर बैठे हैं एक सदी से;
देखना है अब तुझे फ़ुर्सत मिलती है या हमें फ़ुर्क़त

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