19 APR 2020 AT 2:11


जिन्हें हम भूल जाते हैं ,
वो अक्सर याद आते हैं ।
मोहब्बत की किताबों से ....
वो पन्ने ने रूठ जाते हैं ।
मुझे महसूस करते हो ,
दिली- हसरत की बातें हैं ।
मेरे टूटे हुए दिल सुन ,
तपती खामोश रातें हैं ।
खुदाया खैर करना अब ,
फिर वही भीगी बरसातें है ।।
नमिता "प्रकाश"

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