Naincy Goyal   (Naincy)
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Joined 25 July 2017


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Joined 25 July 2017
20 SEP AT 10:42

रोज़ तेरा नाम मेरी दुआओं में रहता है।
तभी तू उस खुदा की पनाह में रहता है।।
ज़माना पूछता है राज़ इन कातिल निगाहों का।
ज़माने को खबर क्या, तू इन निगाहों में रहता है।।

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19 SEP AT 21:05

रूबरू होकर हमारे वो
कैसे मुँह छिपाए बैठे हैं।
हमने अपने को छोड़ दिया उनके ख़ातिर
और वो गैरों से दिल लगाए बैठे हैं।।

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29 FEB AT 6:52

ढूंढेंगे लोग मुझे मेरी ही शायरी में
मिलूंगी मै वहाँ जहाँ ठिकाना हो तेरा।

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28 FEB AT 9:50


रोज़ तेरा दीदार कर पाएें
इतने खुशनसीब हम कहाँ।
तेरे दीदार का इंतज़ार कर पाएें
इतने खुशनसीब वो कहाँ।।

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27 FEB AT 7:27


क्यूँ हिस्सों में मोहब्बत जताते हो
मेरे हो तो क्यूँ कहने से घबराते हो?

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4 JAN AT 20:20


उलझनें कम नहीं ज़िंदगी में मगर,
ज़ुल्फों को सुलझाना भी ज़रूरी है।
गम में डूबी है शाम मगर,
होंठों का मुस्कराना भी ज़रूरी है।।
वक्त का तो मिज़ाज ही है बदलना,
वक्त पर सम्भल जाना भी ज़रूरी है।
बहुत दिल लगा लिया गैरों से,
अब खुद से दिल लगाना भी ज़रूरी है।।

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4 JAN AT 13:30

रुहानी है इश्क़ मेरा
जिस्मानी ये मोहब्बत तो नहीं,
एक तरफा है तो एक तरफा ही सही
ख्वाब है ये कोई हकीकत तो नहीं।
ताबीर हो जाए ख्वाब मेरी जान
हर वक्त यही इंतज़ार रहता है,
गम में रहती हूँ मैं अगर
तू क्यूँ इतना परेशान रहता है।।
सिर्फ मेरा ही ये हाल है
या तू भी बेहाल रहता है,
क्या तुझे भी मेरी जान
इन दूरियों का मलाल रहता है।

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20 DEC 2019 AT 21:00

तू कोई वहम तो नहीं फिर क्यूँ इक ख्वाब सा लगता है,
क्यूँ हर मुलाक़ात में पहली मुलाक़ात सा लगता है।

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19 AUG 2019 AT 10:15

सारी रात गुज़ार दी
अश्कों को समेटने में।
सुबह देखा तो "सड़क अब तक गीली थी"

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18 AUG 2019 AT 12:06

इक अजीब सा रिवाज़ है इश्क़ का
खुद दर्द देकर कहते है,
"हम तुम्हें दर्द में नहीं देख सकते"

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