खून का रिश्ता न सही पर हर रिश्ता निभाते हैं दोस्त
मुश्किल हालातों में भी दिल को सुकू दे जाते हैं दोस्त
संभाल कर रखना यारों ये अनमोल मिल्कियत है
बेरंगी ज़िन्दगी में प्यार के रंग भर जाते हैं दोस्त
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अवसाद रोप देता है जड़ें
नकारात्मकता के पौधे की
जिस पर खिलते हैं फूल
भाँति भाँति के दुःखों के!
वो पौधा पसरता है शनैःशनैः
हृदय के कोने-कोने तक
और कुछ ही समय में
वह पौधा ले लेता है रूप
एक विशालकाय वृक्ष का
और भर देता है हृदय के
सम्पूर्ण रिक्त स्थान को!
पर तुम तो कहते थे,
"अवसाद मन को खोखला कर देता है?"-
नफरतो के इस शहर में
चालाकियों के डेरे है
यहाँ वो लोग रहते है
जो तेरे मुँह तेरे
और मेरे मुँह पर मेरे है-
जलराशि की खुली सतह से,
ऊपर आकर देख रहा,
अरुणोदय की प्रतीक्षा में,
शिथिल गगन को देख रहा,
है प्रभात! तुम आ जाओ,
शिथिल गगन मे छा जाओ,
शिथिलता को सहता सुमन,
ऊष्मा की राह देख रहा!-
इस Lockdown के सन्नाटे में.....
ये बाहर कैसा शोर...
झाँककर देखा तो, बेज़ुबान परिंदो का कलरव...
मानो बयां कर रहे है की...
आखिर इंसान भी समझ गया
पिंजरे की खामोशियाँ...
N. L. Aheer
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