Monika Agrawal   (मोनिका 'अयात')
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Joined 4 December 2016


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Monika Agrawal 12 MAY AT 22:35

मैं परिंदा हूँ
आप आसमां हो,
मैं मछली हूँ
आप समंदर हो,
मैं सिक्का हूँ
आप गुल्लक हो,
वो पंखी है
आप कूलर हो,
वो खत है
आप स्याही हो,
वो कल है
आप आज हो,
आप हम में से हो
या कोई ना हो,
पर..ये पक्का है
'तू'नहीं हो आप
आप तो माँ हो।

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Monika Agrawal 30 JAN AT 16:57

वो जा रहा था,...

मुझे रुकने का कहकर।।

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Monika Agrawal 28 NOV 2018 AT 0:09

अब जाकर, गुफ्तगुं हुई है तुमसे,

कभी मिलते, मेरे मरने से पहले।।

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Monika Agrawal 28 OCT 2018 AT 11:52

आज घर पर कुछ रिश्तेदार आए थे, माँ ने चाय बनाई और गलती से उसमें चीनी डालना भूल गए। सबको दी गयी और सब पीने लगे। सभी ख़ामोशी से पी ही रहे थे,कि तभी एक एक आंटी जो मेरी दूर की ताई जी लगते थे बोल पड़े" इसमें तो चीनी ही नहीं है, फीकी पड़ी है चाय!!किसने बनाई है?"...

"भाभी जी, मोनू ने बनाई है ..अभी अभी बनाने लगी है"कहकर उन्होंने मेरी ओर इशारा कर दिया।
*********
उनके जाने के बाद,
"आप पक्का मेरी माँ नहीं है, मैं आपको कहीं मिली थी क्या कूड़े में?"
"नहीं बच्चा, वो तू अभी बच्ची है ना..बस इसलिए"..

"अबकी बार माफ़ किया, लेकिन बदला लूँगी मैं आपसे, वैसे एक बात है ये सुना था कि माता पिता झूठी तारीफ़ करते है अपने बच्चों की..आप तो मेरी नाक कटाने पर लगी हुई है" कहकर मैं उनके साथ हंसने लगी।।

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#चाय #2 #यादें #Hindi #yqbaba #yqdidi #ayat

अभी बस वो ताई जी देख ले ये 😁😊

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Monika Agrawal 23 OCT 2018 AT 20:57

वो कुछ अलग-सा था,


पर वो सिर्फ़ मेरा था।।

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Monika Agrawal 21 OCT 2018 AT 1:01

कहते रहते है वहीं लोग,
"बदल गयी हो तुम"

जो खुद बदल गए है।।

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Monika Agrawal 14 OCT 2018 AT 19:20

मैं माँ के साथ पार्क से घर आ रही थी, और बीच में मुझे एक बाबा दिखे। जो एक जगह बैठे हुए थे, मैं पहले से उनको नहीं जानती थी और अपनी आदत के अनूसार मैंने झट से उनको "राम- राम" कहा, और बड़ी स्माइल के साथ आशीर्वाद लेने के लिए उनके सामने अपना सिर झुका दिया।पर फ़िर बिल्कुल नन्हा सा सकोंच हुआ की शायद वे मेरा जवाब न दे।
लेकिन उन्होंने मुझसे भी बड़ी,इक बड़ी लंबी स्माइल के साथ मेरे सिर पर हाथ रखा और कहा"राम-राम"।
अभी आप सोच रहें होंगे की इसमें बड़ी बात क्या है, लेकिन बड़ी बात ये है की उन्होंने सिर पर टोपी,मुँह पर ढाढ़ी- और कुर्ता पज़ामा पहन रखा था।

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Monika Agrawal 5 OCT 2018 AT 21:19

वो शीशे के मकान में रहता है,..


और खुद को, गाँधी समझता है।।

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Monika Agrawal 19 SEP 2018 AT 18:03

कामयाब हो गया हूँ मैं, जिंदगी में,

पर शहर में हमेशा मैं, गाँव बना रहा।।

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Monika Agrawal 10 SEP 2018 AT 17:50

तुम्हारे खुले पिंजरें में,...
मिरा परिंदा फ़िर लौट आता है,

थक कर, कैद होने के लिए।।

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