Mishty _Miss_tea   (Mishty's moment ©)
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Joined 30 September 2018


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4 HOURS AGO

ख़ैर सच यह है की
ज़ख्म तो सिर्फ़ अपने देते हैं
.
.
गैर तो केवल
तुम कैसे हो???... पुछकर
उन पर नमक छिड़कते हैं

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22 HOURS AGO

जनाब... असल में मोहब्बत खासियतों का तकाज़ा है,
दोस्ती हो भी जाती है तो... यारों की खामियां देखकर

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6 AUG AT 18:23

तौबा इश्क़... ये जो तबियत बिगड़ती जा रही है,
रूह तकलीफ़ में है और आँखें अश्क बहा रही है

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6 AUG AT 12:02

कभी सुख.. कभी दुःख.. मायूसी.. मौसिकी
मैंने हर तकलीफ़ हर त्यौहार देखे हैं..

छोड़िए इधर उधर की बातें ... नेमत!
मैंने चाय के भी लुत्फ़ हज़ार देखे हैं..

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5 AUG AT 11:57


हकीकत से परे तू मेरी ख्वाहिश है सनम,
चलो इस बार ऐसे ही ख़्वाबों में मिलते है,

खुशियां लौट आयेगी सिरहाने रख कर,
रूह से रूह को इतना गले मिलते है,

हक़ीक़त से है वास्ता तो रूबरू हो जाएं,
नहीं तो इत्मीनान से तुझे सिर्फ़ सोचते है,

कोशिश कभी जाया नहीं होगी देख लेना,
ख़्वाबों को हक़ीक़त की नज़र से देखते है

हकीकत से परे चलो ख़्वाबों में मिलते है,
तू हमसफ़र बन जाए ऐसी कसक से मिलते है

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5 AUG AT 8:08

कुछ अधूरे से बैठे रहे किसी की कमी लेकर,
उफ़...तन्हा चाय पीना, आँखों में नमी लेकर

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4 AUG AT 10:43

છે નાદાની પ્રેમ માં એટલી
હોય સવળું ને ઊંધું નજરે ચડે છે,

આમ તો આંબી શકાયું હોત આભ પણ
નાદાન જે હૃદય માં ઉતરી પડે છે,

કોઈ આંખોં ગઝલો કહે છે મહેફિલ માં,
તો કોઈ ને કશું કસ્તર નડે છે

વિજેતા બની ને તરણ સ્પર્ધા માં,
કોઈ..કોઈ ની આંખોં માં ડુબી મરે છે,

છે જગત માં સઘળું સુખી ચાલાક બની
અહીં નાદાન જે પ્રેમ માં રડે છે,

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4 AUG AT 10:35

मोहब्बत को गुमराह कर देते हैं कुछ लोग,
कुछ शिकायतें करते नज़र आते हैं,
कोई शराब, कोई शबाब,किसी की गज़लें बेशुमार
तो कोई चाय पीते भी नज़र आते हैं

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3 AUG AT 14:41

ताकते रहे निगाहें उनके ही घर की तरफ़,
इक शख़्स मुझे चांद से भी दूर लग रहा है

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3 AUG AT 12:28

उलझती ज़िंदगी को तुम सुलझा दो ना,
क्या खटक रहा है दोनों के बीच बता दो ना,

यह धागे बहुत कच्चे होते है मन के
इसे अपने रंग में रंगे कोई ऐसा रंग लगा दो ना,

मायने रखता है कुछ फितूर भी मोहब्बत में,
इन धागों से मोहब्बत का लिबास बना दो ना,

जैसे मझधार में पहुंची नैया डूब ने लगी है,
हमारे रिश्ते की यह नैया तुम पार लगा दो ना,

कहाँ हम कहाँ तुम अलग अलग खड़े है दोनों
इस गिरह को खोल कर नजदीक ला दो ना,

उलझती ज़िंदगी को तुम सुलझा दो ना,
क्या खटक रहा है दोनों के बीच बता दो ना,

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