Mishty _Miss_tea   (Mishty's moment ©)
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Joined 30 September 2018


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8 HOURS AGO

बहुत बोलने वाली लड़कियां
एक उम्र गुजार देने के बाद मौन हो जाती है,
बाबा के घर मोगरे के लिए मुंह फुलाती हम लड़कियां
किसी और आंगन में रोप दी जाती है,

कभी घर की स्मृतियां गले में फंसती है
और बाबुल का घर उसे खींच रहा होता है,
मां के दुलार से सजधज कर
मायका छोड़ के जाने के रीति रिवाज़ में
ईश्वर को कोसती हुई
रोती हुई, सिसकियां लेती हुई, बिदाई के वक्त
चेहरे पर आखिरी .…. उदास मुस्कुराहट लिए
जब दहलीज पार करती है
लड़की की उस मुस्कुराहट पर ख़ुद ईश्वर
अपनी आँखें भिगोते नज़र आते हैं !!

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18 HOURS AGO

आसमां को लगाना पड़े पैबंद बादलों का
ख़ुदा करे तुम्हारी आगोश में वो चांद हो

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17 JUN AT 20:21

काश मैं इश्क़ लिखूं
और तुम मिल जाओ

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17 JUN AT 20:17

જોજો જરા..
તરછોડાયેલી તિરાડ સાંધતા પહેલાં 
હૃદય દીવાલ પરથી 
જુનો ફોટો ઉતારી લેવો ભુલાય નહિ...

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16 JUN AT 13:17

और जीत ...अर्जुन की हुई
उस जीत को ढांका गया
काैरवों की देहो से,
भीष्म के तीरों से,
कुंती के अश्रुओं से,
क्यों की उसे दर्द पता था
उंगलियों की पोरों से लिखी गई यातनाएं
तीरों पर चिपके रहे रक्त की,
अब युद्ध शांत है क्यों कि गीता शांत है,
बस अब कुछ जीवित है तो
कुछ संचित कर्मो का कोलाहल 
हे कृष्ण !! तुम कहां हो
अब भी एक आहुति शेष है 
अब मृतपाय रूप में 
भटक रहे हैं ज्ञान, ध्यान और मनुष्यता 
कहां हो कृष्ण....
अश्वास्थामा अकेले पड़ गए हैं इस धरती पर....

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16 JUN AT 10:47

ख़ुद की ख़ैर रखो और ख़ुद की खबर रखो,
जान जाओगे तुम पिता की खैरियत कितनी है,

गैरों से ताल्लुक़ रखो और जुदा होकर देखो,
हम से मत पूछो तुम पिता की अहमियत कितनी है,

पूछोगे गैर से वफ़ा का सिला तो मुकर ही जाएंगे,
हम से मत पूछो तुम पिता की कैफ़ियत कितनी है,

हो अगर नम कभी आंखे को खुद समझ जाना,
हम से मत पूछो तुम पिता की मोहब्ब्त कितनी है,

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16 JUN AT 10:40

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15 JUN AT 16:09

देह से ज्यादा मन भारी लगने लगा
तब आंखों ने जरा सा तकिया भिगो दिया
और मन को और ज्यादा बारिश की याद सताने लगी....

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15 JUN AT 13:12

कोशिशें धूप सी है और बारिश का मौसम
खिड़कियों से उम्मीद लौट आई है कमरे में,

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15 JUN AT 12:58

હોય ઉથલપાથલ પુનમ નાં દિવસો માં
ઝાંઝવાં ને દરિયા ની ખબર નથી હોતી,
કોણે કહ્યું મન ને કોઈ ની અસર નથી હોતી,
હૃદય ને બસ મન ની ખબર નથી હોતી...
કઈ રીત થી નીકળે મન ની ઉથલપાથલ
વિચારો ને વાંચવા ની રીત ખબર નથી હોતી,
હૈયે થી વછૂટી ને ચગળ્યા કરે છેક સુધી
હરએક ને દુઃખ પચાવવા ની ખબર નથી હોતી

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