Mishty (Miss_tea)   (Heartbeat ❤️)
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Joined 30 September 2018


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Joined 30 September 2018
12 HOURS AGO

तहज़ीब, अदब, सलीखे
ना जाने इश्क़ क्या संभाले हुए है...
झुकी नज़रों से चाय पीने वालों ने
हर तरीके पाले हुए है....

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YESTERDAY AT 18:58

ये आबोहवा... ये शाम,और ये बैचेनी ....का की जै...
यह तन्हाई, यह बेबसी... इन लम्हें बस चाय पी जै...

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YESTERDAY AT 17:09

ख़्वाब को हकीकत बनाने की
जद्दोजहद में
हकीकत भी ख़्वाब बनकर रह गई

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YESTERDAY AT 10:51

उलझती ज़िंदगी को तुम सुलझा दो ना,
क्या खटक रहा है दोनों के बीच बता दो ना,

इक इक छोर पर अलग अलग खड़े है हम
इस गिरह को खोल कर नजदीक ला दो ना,

यह धागे बहुत कच्चे होते है मन के
इसे अपने रंग में रंगे कोई ऐसा रंग लगा दो ना,

मायने रखता है कुछ फितूर भी मोहब्बत में,
इन धागों से मोहब्बत का लिबास बना दो ना,

जैसे मझधार में पहुंची नैया डूब ने लगी है,
हमारे रिश्ते की यह नैया तुम पार लगा दो ना,

उलझती ज़िंदगी को तुम सुलझा दो ना,
क्या खटक रहा है दोनों के बीच बता दो ना,

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25 SEP AT 11:39

उफ़.…..ये दिलों की गिरहें !!

धड़कनों के अलावा ना जाने कितने युगों से
कल्पनाएं, सपने, स्नेह,
विरह, वेदना, वादें और विडंबनाएं बंध करके
बिखर जाने के डर से यह गिरहें दिलों की कस दी जाती है
और बांध रह जाते है सारे एहसास
दांत से उगलियों के काट लेने के जैसे चुभते हुए...
.
और कुछ समय पश्चात इस
असहनीय पीड़ा समय परिवर्तन के होते होते
खोल दी जाती है सारी गिरहें और
यही पीड़ा...
यह वेदना और विडंबनायें
बिखर जाती है किताबों में शब्द बनकर
और कभी कभी आंखों से अश्रु बनकर...

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24 SEP AT 20:02

तुम्हारी अनुपस्थिति में,
मैंने थैले में रखा होता है
एक बटुआ
जिसमें थोड़ा थोड़ा कर अक्सर
इकठ्ठा किए हैं तुम्हारे लिए एहसास,

तुम अपनी परीक्षा की घड़ी में
जब दुष्कर लगे मन का सहजना,
सिर के भारी होने पर
कमी लगे तुम्हें मेरी छुअन की,
जब तुम्हारे सीने के बाएं तरफ़
सताने लगे कोई खालीपन, मेरी कमी
तो थोड़ा थोड़ा करके
खर्च कर लेना उसी बटुए से
मेरी कुछ बेतुकी बातें, मेरे स्पंदन,
थोड़े से चुंबन... और
मेरे भीतर के एहसास

और खरीद लेना तुम्हारे लिए
एक मुस्कान और मनचाही खुशी !!!

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24 SEP AT 18:53

हौंसला रख और कदम उठा,
मेहनत कर और पसीना बहा,
कुंआ खोद ले या रेत को निचोड़ दे,
आँखें मत बरसा, ख़ुद को मत तरसा,
प्यास है अगर रूह की तो कुछ भी कर जा
केवल औंस को चाटने से प्यास नहीं बुझती,
केवल हाथ होने से किस्मत नहीं खिलती,

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24 SEP AT 9:25

अश्क... आग.... ख़ाक और धुंआ धुंआ,
इश्क़ के इल्ज़ाम में क्या है इंतिहा के सिवा

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24 SEP AT 8:48

किसी ने मुझसे पुछा है
मेरी चाय के बारे में,

सुनो....ये बिल्कुल वही होता है
जो होता है मोहब्बत के इशारे में,

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23 SEP AT 12:52

रात की ख़ामोशी ने क्या कहर ढाया है,
अंदाज़_ए_बयाँ में चांद तन्हा नज़र आया है,

ना कोई गुफ्तगू,ना कोई हलचल है दिखी
आसमाँ के सितारों को मैंने ये दर्द बताया है,

हल्का सा दर्द और ये सिलवटें लिहाफ़ की,
मेरे चाक जिगर को दोनों ने बहुत सताया है,

बड़ी मशक्कत के बाद है रोशन ये तिश्नगी,
नेमत !! दिए के बदले मैंने दिल जलाया है,

कोई गर पुछे मुझसे मेरे जागने का सबब,
कहूँगी मुझे महबूब की यादों ने जगाया है,

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