Miss Tea (Mishty)   (Heartbeat ❤️)
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Joined 30 September 2018


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Miss Tea (Mishty) 3 HOURS AGO

मोहब्ब्त में ना जाने वो दिल का कैसा हाल कर बैठे है,
हमें गवाँ दिया पर अब हमारे सारे ख़त सम्हाल कर बैठे है

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Miss Tea (Mishty) 8 HOURS AGO

प्यार भरी सुबह की
कुछ ऐसे शुरुआत हो,
मेरे हाथों में गर्म चाई
और आपकी आंखों में
मोहब्ब्त वाली बात हो....

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Miss Tea (Mishty) 19 HOURS AGO

चाय,
इश्क़ और
तन्हाई,
मत पूछना
फ़िर,
की ये बरसात
क्यों आई.....

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Miss Tea (Mishty) 19 HOURS AGO

सच्ची मोहब्बत इक दूसरे में क़ैद होती है,
इश्कियों में अक्सर इंसान परिंदा बन जाता है

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Miss Tea (Mishty) 20 HOURS AGO

रात यक़ीनन
रोई होगी बेतहाशा,
यूं हर सुबह
गीला होना
कतई
फूलों के किरदार
में न था....

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Miss Tea (Mishty) YESTERDAY AT 14:29

तूं मेरे भीतर कौन....

मैं तेरे भीतर कौन?

मुड़ के देखा तो पाया,

बचा है ... सिर्फ़ मौन

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Miss Tea (Mishty) 4 JUN AT 23:02

बालुओं संग मिल जाना,
महक सोंधी खुशबू बन जाना
पवन के जोंक से उड़ जाना,
नर्म मुलायम मिट्टी हो जाना,
तेरे घर की तरफ़ बह जाना,
तेरी सांसों में ही रह जाना,
काश मुमकिन हो कुछ ऐसे
मेरा मिट्टी से वापस मिट्टी बन जाना,

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Miss Tea (Mishty) 4 JUN AT 18:08

चलो हद से गुज़र जाएं बक़ा_ए_इश्क़ की तहत,
वो जुनून_ए_यार और वो चाह_ए_वफ़ा की बदौलत

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Miss Tea (Mishty) 4 JUN AT 0:44

लिखती हूं मैं,
वो ख़त सिर्फ़ तुम्हारे नाम पे
अपने हाथों से,
यह कोई तुम्हारे फॉरवर्ड मैसेज नहीं है,
मैं लिखती हूं
तुम्हारे प्रति प्रेम को जो कह नहीं पाई,
वो अनुराग जो कभी बता नहीं पाई,
वो प्रेमगीत जो गाना चाहती थी,
प्रेम राग जो सुनाना चाहती थी,
वो तुम्हारे प्रति असीम प्रेम को लिख देती हूं,
डाकिया पूछ रहा था मुझसे,
इतने प्रेम पत्र??
अनगिनत, रोज रोज कोई लिखता है क्या?
पर ये कोई साधारण प्रेमपत्र कहां?
उंगलियों से वो ही लिखा गया
जो हृदय से उतारा गया,
इसे लिखती हूं, चूमती हूं, देखती हूं,
महसूस किया होगा तुमने
वो लिफ़ाफे में सिर्फ प्रेमपत्र नहीं होता,
में उड़ेद देना चाहती हूं
अपने सारे प्रेम को, समर्पण को,
और शायद अपने आप को भी...
वक़्त का क्या पता?
किसी दिन वो ही डाकिया
मेरा प्रेम, तुम्हें लिखा कोई ख़त
लौटा दे और कहे :-
उस पते पर वो शख्स तो रहता है
पर अब वहां तुम्हारा
कोई महबूब नहीं रहता.....

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Miss Tea (Mishty) 3 JUN AT 23:54

हां पता है मुझे,
आपने बताया था
बड़ी तकलीफ़ होती है आपको
ये सब देख के,
वो इस साल की महामारी,
वो पिछले साल का पतझड़,
वो फटे बादल का बरसना,
वो बिना चांद का आसमां,
वो रेगिस्तान की गर्म रेत,
वो बिना वजह ढले खेत,
वो बरामदे में बेल का सुखना,
वो पता ना मिलने पर वापस लौटे ख़त,
वो किताब में सूखे पड़े फूल,
वो चाय का हाथों से गिर जाना,
हां आपने तो दुनिया देखी है,
सब देखा है आपने,
पर क्या आपने
किसी और का दामन थामें
हमेशा के लिए जाते हुए
अपने महबूब को देखा है कभी?
बिल्कुल मेरी तरह.......

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