Miss Tea (Mishty)   (Heartbeat ❤️)
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Joined 30 September 2018


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18 HOURS AGO

मैंने वक्त पे छोड़ दिए है
वक्त के सारे सितम,
शायद घाव लग जाए नये
या मिल जाए कोई मरहम

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22 HOURS AGO

परेशान था बहुत दिल जीस फासलों से
वो मिलने आया था... मैंने चाय बनाई थी,
कुछ इस तरह मोहब्ब्त हम दोनों ने निभाई थी,

सुरज रोज़ की तरह रोशन था वक्त पे,
इश्क़ में हमने थोड़ी सी धूप खिलाई थी,
कुछ इस तरह मोहब्ब्त हम दोनों ने निभाई थी,

कैसे कहे थी क्या असर ठंडी हवाओं की
उसने चुमा था मुझे और मेरी सर्दियां भगाई थी
कुछ इस तरह मोहब्ब्त हम दोनों ने निभाई थी,

मुद्दत से आशियां_ए_दिल खंडहर था मेरा
मैंने महबूब की इक वहां तस्वीर लगाई थी
कुछ इस तरह मोहब्ब्त हम दोनों ने निभाई थी,

इक दरियां जो पार ना हुआ था कभी
इकदुजे की आंखों से हमने ये दूरियां मिटाई थी,
कुछ इस तरह मोहब्ब्त हम दोनों ने निभाई थी,

सफ़र हसीं और ख़्वाब मुकम्मल हो गया
इश्क़ में ना जाने फ़िर भी नींद गवाई थी,
कुछ इस तरह मोहब्ब्त हम दोनों ने निभाई थी,

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YESTERDAY AT 13:33

उनके बग़ैर बेबसीयों का आलम ना पूछिए जनाब!!
दिल मरघट सा और हम ठहरे.... जीने के शौकीन!!

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YESTERDAY AT 13:04

लोग आते जाते बहुत है इस दिल के मकाँ में,
ये चौखट फ़िर भी उसकी ही राह... पूछती है,

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YESTERDAY AT 0:13

कुछ दूरियाँ जलाती है हमें,
कुछ नजदीकियाँ आग लगा देती है

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23 JAN AT 15:38

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23 JAN AT 3:40

काश!! मैं बांट सकती अपने आधे ज़ख्म,
आज भी मेरे कातिल के पास मेरे जीने की दवा है

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23 JAN AT 3:19

उसका घर आना कोई काम ना आया सुखनवर,
वो नींद में मशरूफ और हम इक तरफा मोहब्ब्त में

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22 JAN AT 12:55

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22 JAN AT 12:55

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