मेरी कलम से... आनन्द कुमार  
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शब्दों से कुछ-कुछ कह लेता हूं...
Joined 10 April 2018


शब्दों से कुछ-कुछ कह लेता हूं...
Joined 10 April 2018

"सच्चे हिन्दुस्तान थे तुम"

एक "साहस",
एक "इतिहास" थे तुम।
युवाओं की "सोच" के,
एक "अटूट विश्वास" थे तुम।
"प्रेरणा" थे हर पीढ़ी के,
देश की सेना के "शान" थे तुम।
"मिसाइल मैन" की पदवी तेरी,
भारत के "सरताज" थे तुम।
शब्दों के थे तुम "बाजीगर",
सादगी के "ईमान" थे तुम।
जन्म से थे तुम "मुसलमान",
और सच्चे "हिन्दुस्तान" थे तुम।

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जिन्दगी गुमनाम थी, खुशनाम हो गयी,
प्यार के तरानों में, बदनाम हो गयी।
हर रौनके तस्वीर, इसकी बदल सी गयी,
तेरी इबादत ही, मेरी जान हो गयी।
तूने साथ दिया तो, मुझे सबकुछ दे दिया,
हर शख्स से मेरी, जान-पहचान हो गयी।
ऐ जिन्दगी में "आनन्द" को बहार देने बाले,
मेरी जिन्दगी बस तेरे ही नाम हो गयी।

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"दो शब्द"

गुमनाम सागर हुआ है मेरा जीवन,
कोई आकर डूबे तो खुशियां मिलेगी।

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समय समय की बात...

पहले लोग आलोचना से, सीखने
की कोशिश करते थे,
अब लोग आलोचना से, एक दूसरे को ठीक करने की कोशिश करते हैं।

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मेरी आँखों में, खूद को देख लोगे,
पर मेरी बेबसी, कंहा से जानोगे।
मै प्यार हूं, कोई दरिया नहीं,
की फेंक पत्थर, लहरें देख जानोगे।

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कहा जमाने से उसने, मेरे प्रेम में दाग है।
मंदिर में उसके संग, वे मन्नते मांगते निकला।
सामने मिलता है तो, फेर लेता है नजर,
और कहता है मेरी आंखों में कोई दूजा निकला।
इश्क का फरेब भी, बड़ा जालिम निकला,
तोहमतें भी लगाया और बेवफा निकला।

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राम मंदिर निर्माण की आधारशिला रखी जानी है, गर्व की बात है। इस शुभ अवसर पर सम्भव हो तो लालकृष्ण आडवाणी जी को भी जरूर आमंत्रित करें।

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शब्द शब्द का फेर है,
शब्द ही चुभता है,
शब्द ही सुकून देता है,
शब्द ही प्रेम देता है,
शब्द ही दर्द देता है,
शब्द को सहेज कर,
शब्द को संभाल कर,
शब्द को संजो कर,
शब्द को परोसिए,
शब्द ही रिश्तों को तोड़ता,
शब्द ही रिश्तों को जोड़ता।

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आंख कुछ कहती है, जुबां कुछ कहती है,
मिल कर शबनमी चेहरे से सिर्फ संगीत की लय कहती है।
ऐसे आया न करो, तुम हर वक्त मेरे सामने,
मेरे बन्द लब तुम्हें देखकर, सिर्फ गज़ल कहती है।

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बहुत जरूरी हो तो घर से बाहर निकले, सरकार गिराने व बचाने के लिए नेता कहां से कहां तक निकल जा रहे।

बुरबक पागल हो का, ई जरूरी काम है न।

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