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Meenakshi Sethi 5 OCT 2019 AT 3:23

लिखना भूल गए
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उस पुराने पीपल का किस्सा, बचपन की चारपाई में हिस्सा,
वो खट्टी इमली वो मीठा आम, घूमना गुट में सुबह और शाम,
उस रेत के टीले से फिसल कर गिरना, छत पर बेमक़सद ही फिरना,
बालों के वो लाल रिब्बन,काले जूते बिल्कुल चमाचम,
सच्ची सहेली से झूठी लड़ाई, कच्ची चूड़ियाँ नाजुक कलाई,
गर्मियों की धूप तंदूर की रोटी,धीरे-धीरे बढ़ती चोटी,
स्कूल में तेल चुपड़ कर जाना, रविवार को बाल लहराना,
स्टापू, गिट्टे, बैडमिंटन की कहानी, जीत के लिए थोड़ी-थोड़ी बेईमानी,
छोटे भाई से छुपकर जाना, फिर मम्मी से तगड़ी डाँट खाना,
पच्चीस-पचास पैसों की वो दुनिया, रंगीन गोलियाँ बेचता बनिया,
गणित में कच्चे हिसाब में पक्के, छोटी-छोटी जेबों में खनकते सिक्के,
मिट्टी की गुल्लक चाँदी की कटोरी, कॉमिक्स पढ़ना चोरी-चोरी,
दिन में सुलाने वाला दुश्मन, तभी तो मम्मी लगतीं थी हिटलर,
रात को गिनना चाँद-सितारे,सपने देखना प्यारे-प्यारे,
अब आँख खुली तो चौंक कर देखा, खुद को देते-देते धोखा,
हम बेवजह मुस्कुराना ही भूल गए, और गमों में ऐसा डूबे,
बचपन लिखना भूल गए ।

- Meenakshi Sethi #Wings of Poetry


हर बात लिखी तो नहीं जा सकती!
#लिखनाभूलगए #collab #yqdidi #YourQuoteAndMine
Collaborating with YourQuote Didi #wingsofpoetry

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