Meenakshi Sethi   (Meenakshi Sethi #Wings of Poetry)
673 Followers · 108 Following

Published Writer with- 'Wings Of Poetry' on Notionpress and संदूकची at #YQ
Joined 26 November 2018


Published Writer with- 'Wings Of Poetry' on Notionpress and संदूकची at #YQ
Joined 26 November 2018
7 SEP AT 1:52

जब-जब जंग हारी ज़ुबां वालों से,
मैंने जीत लिए लफ्ज़ अनकहे सारे,
वो जीत कर भी मझधार में रुका है अब तक,
मैं पार दरिया हुआ अपनी ख़ामोशी के सहारे !

-


7 SEP AT 1:39

हर मुलाकात के सिरे पर एक अलविदा दर्ज़ है
हर अलविदा के सिरे पर इकरार है फिर रुबरु होने का
अलविदा से मुलाकात की दूरी इतनी भी न हो
कि आ पहुंचे समां ज़िंदगी से विदा लेने का

-


1 SEP AT 18:39

रूहों के दरम्यान कब फासले हुए हैं
जिस्म अलबत्ता जुदा हुए हैं
सपने सा अहसास हुआ है
नींद की झीनी चादर के पार
किसी कहानी में फिर एक साथ
हम-तुम जैसे बयाँ हुए हैं...

-


25 JUL AT 17:25

तुम्हारी कोई याद दर्द की टीस सी नहीं चुभती अब,
जिसे मैंने प्यार समझा था उस जज़्बात की उम्र पूरी हो गई ।
शायद इसे ही मोक्ष कहते हैं!

-


11 JUN AT 19:40

मैं-मैं करता मैं नहीं मरता
मैं मरे तो तू होए
मैं से मैं निकाल दे रब्बा
कब तक मैं को धोएं
दाग ये गहरा चूनर झीनी
देख-देख मन रोए
युग बीते मैं से तू बिछड़ा
कब तक मैं में सोएं
मैं चलूँ तो भूलूँ रस्ता
तू ले चले तो फिर न खोएं
कहे मुसाफ़िर जन्मों से भटका
मुझे राह सुझा दे कोए

-


3 JUN AT 5:29

आलम उस मौत का भी, कितना खास होता,
अगर मरने से पहले मरना न इतना आम होता !

कुछ पल तो लुत्फ़ उठाते मरने से पहले मुर्दे,
कोई पल गर ज़िंदगी का, ज़िंदगी की आस होता,
अगर मरने से पहले मरना न इतना आम होता !

लम्हा-लम्हा मरते सपने पल-पल बिछड़ते अपने,
ये आँसुओं के चश्मे, ये सब मंज़र न काश होता,
अगर मरने से पहले मरना न इतना आम होता !

सांसें होती गर न भारी उम्र कटती उम्रों वाली,
प्याला दिलों का भी, लबरेज़-ए-मोहब्बत होता,
अगर मरने से पहले मरना न इतना आम होता !

Inspired from-
"कहूँ किस से मैं कि क्या है शब-ए-ग़म बुरी बला है
मुझे क्या बुरा था मरना अगर एक बार होता"

-


9 MAY AT 0:40

माँ
बस यह एक शब्द ही काफ़ी है हर स्थिति  से मुझे बचाने को ,

एक मजबूत सहारा है हर मुश्किल में जीत जाने को,

दुआओं की एक जादुई पुड़िया है ठोकर लगे तो फिर से उठाने को,

माँ तू है तो ही मैं सक्षम हूँ हर हालात से टकराने को।


Happy Mother's Day

-


12 APR AT 16:44

जब-जब पढ़ती हूँ कुछ ऐसा, बहुत कुछ याद आ जाता है
अहसास होता है कितना कुछ गुज़र गया दिल की रहगुज़र से
अब ठीक लगता है बचपन में माँ का वो कहना
पढ़ो यूँ कि दिल में उतर जाए, दिल में उतरा सदा याद रहता है

-


7 APR AT 15:27



जो यकीं की दौलत से खाली हो वो दिल हर्फ़ का गुलाम होता है,
जो सौंप दे आपा मुर्शिद को बिन डूबे दरिया पार वही होता है ।

-


28 MAR AT 13:20

तवील रातों के ऐ कारवां
मोम काफ़ी नहीं है पास मेरे
अंधेरों को इस कदर न भड़का
एक नए दिन की आरज़ू रूह को है
सफ़र रात में यूँ ही न ख़्तम होगा
सूरज को आखिर निकलना होगा

-


Fetching Meenakshi Sethi Quotes