Meenakshi Sethi   (Wings Of Poetry)
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Joined 26 November 2018


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Joined 26 November 2018
20 MAR AT 1:11

वो जो अधूरा रह गया
मेरे होने में तेरा हिस्सा
तेरी कहानी में मेरा किस्सा
मेरे फसाने में बयाँ तेरा
तेरी हकीकत में शुमार मेरा
मेरे वजूद पर अख्तियार तेरा
तेरे वादों पर ऐतबार मेरा
मेरे लम्हों को इंतज़ार तेरा
तेरी कसौटी पर मेयार मेरा
मुझमें कहीं पूरा है तू
तुझमें कहीं अधूरी हूँ मैं
ये जो अधूरा रह गया
पूरी कहानी कह गया

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21 JAN AT 14:59

एक अलसाया सा जाड़े का इतवार
मंद आँच में ठिठुरा सा सूरज
धूप का इंतज़ार करती बालकनी
और मेरे हाथ में चाय का गिलास
चाय से उठता धुँआ
धुँए संग उड़ते से विचार
कौन सा पकड़ूँ कौन सा छोड़ूँ
किसे कराऊँ थोड़ा और इंतज़ार
या जाने दूँ सब को और अजनबी हो जाऊँ
अपने आज से निकल
कई साल पीछे छूटे बचपन में खो जाऊँ
उन जाड़ों के सुकून में उतरूँ
जेबों में गर्माहट भर लाऊँ
न कोई चिंता, न फिक्र, न बे सुकूनी
हाथों में एक पेंटिंग ब्रश
आँखों में ढेर से सपने
पूरा जीवन एक खाली कैनवस
जो चाहे रंग लो, जैसा चाहे रंग लो
काश बचपन का वही पेंटिंग ब्रश
उठा कर यहाँ साथ ले आऊँ
फिर से रंग दूँ सपने, उड़ते आज़ाद परिंदे
कुछ तिकोने से पहाड़,
कुछ झोंपड़ीनुमा खुशहाल घर
घरों के बाहर पेड़, पेड़ पर रस्सी का एक झूला
उस पर झूलते खिलखिलाते सपने,
आसमान छूती हिम्मत की पींगें
और एक पुरजोश इतवार!

मीनाक्षी #wingsofpoetry

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8 JAN AT 2:30

बहुत तवील नहीं ये सफर, फिर ये ग़फ़लत क्या है?
चंद बरसों की है रहगुज़र तो ये उलझन क्या है?

झीनी चादर है मैली, दाग-ए-किरदारों से
कफ़न है छोटा हद से बढ़ने की ज़रूरत क्या है?

दफ़्न हो जाएँगी ख़्वाहिशें, दो गज़ ज़मीन तले
तेरे ख़्वाबों की क़ैफ़ियत की हैसियत क्या है?

देखता कौन है, यहाँ किसी और के ज़ख़्म-ए-जिगर
टूटे अरमानों की फ़ेहरिस्त की ज़रूरत क्या है?

मुट्ठी में भींच रखा है जो, एक टुकड़ा सूरज
साँझ ढलने पर इस टुकड़े की मिल्कियत क्या है?

चल चल दें, नफ़स नींद के उस पार की कायनात तले
बे-ख़्वाबी के इस पार की दुनिया से निस्बत क्या है?

मीनाक्षी #wingsofpoetry

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31 DEC 2023 AT 23:04

End Of The Week
End Of The Month
End Of The Year
May with this End all worries, tensions, sadness and negativity from Everyone's life also end and May we all step into 2024 with Positivity, smiles and a lighter heart ❤️
Happy New Year! 😊

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30 NOV 2023 AT 22:37

Rising Above

And she learnt
From smoke
Which tends to move upwards
Leaving it's own identity behind
Surrendering itself to the air
Which is wise and sane
Rising above the flames

Meenakshi Sethi

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14 OCT 2023 AT 3:12

कहीं किधर भी जाइए मलाल ही मलाल है
हर इक जवाब में छुपा इक नया सवाल है
हैं खोजती हैं मंज़िलें वो राहें जो उनसे आ मिलें
राहों को लेकिन आज भी मुसाफ़िरों की तलाश है
सफर जो छूटते रहे कदम जो रूठते गए
क्यों आज भी नशेमन को परिंदों का इंतज़ार है
वो वक्त्त था वो बह गया वो अक्स था वो ढह गया
जो गवाह बन कर रह गया वो भी एक सराब है

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14 OCT 2023 AT 2:48

My unseen dreams
Scattered all around
As twinkling fireflies



-Meenakshi Sethi @wingsofpoetry

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14 OCT 2023 AT 1:26

अब्र-ए-सियाह से ढके सर
अँधेरे से नहीं डरा करते
ये जुनूँ रखते हैं जुगनू उगाने का
आफ़ताब का नहीं रास्ता तकते

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26 AUG 2023 AT 23:03

What remains is just dust
Body will turn into ashes
Play of desires will rest
No one will be on your side
When you're going to bid
Final goodbye!

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11 AUG 2023 AT 21:05

कितनी साँसें खर्च कर डालीं
कितनी अभी आनी-जानी हैं
किस साँस के साथ एक दिन
रूह तन से अलग हो जानी है
कौन सा सूरज आखिरी होगा
किस रोज हर शब ढल जानी है
कितनी सौगातें अनदेखीं कर दीं
कितनी ॠतुएँ बह जानी हैं
और ज़रा भी नहीं सोचते हम

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