Meenakshi Sethi   (Meenakshi Sethi #Wings of Poetry)
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Published Writer with- 'Wings Of Poetry' on Notionpress and संदूकची at #YQ
Joined 26 November 2018


Published Writer with- 'Wings Of Poetry' on Notionpress and संदूकची at #YQ
Joined 26 November 2018
28 NOV AT 21:56

तुम हो सकती थी
चिड़िया, बादल, हवा या तिनका ही
उड़ सकती थी अपनी उड़ान
बिना किसी लाँछन
फिर तुमने क्योंकर चुना स्त्री होना ?

तुम उग जाती कहीं भी
जंगली बेल, नरम दूब, या पीपल बन कर
बढ़ती रहती बिना रूके बिना थके
बिना किसी विवाद
फिर तुमने क्योंकर चुना नारी होना ?

तुम बह सकती थी
नदी, हवा, सुगंध बनकर ही
छू लेती कोई भी मनपसंद तीर या आकाश
बिना किसी बंधन
फिर तुमने क्योंकर चुना औरत होना ?

तुम नहीं चिड़िया, नहीं बेल, नहीं नदी
तुम तो हो एक आसान शिकार
जिस पर प्रश्नचिन्ह लगाना है आसान
बिना किसी अधिकार
फिर तुमने क्योंकर सोचा तुम हो आज़ाद ?

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28 NOV AT 3:15

तुम जो मेरे मौन को पढ़ न सके
मैं शब्दकोश खाली भी कर दूँ
तो क्या ही समझ पाओगे ?

तुम जो मेरे शब्दों को समझ न सके
मेरे मौन के गहरे अंतःकरण तक
कहो भला कैसे पहुँच पाओगे ?

इन शब्दों और इस मौन को लाँघ कर ही
मुझ तक आना; छलावों की मायानगरी के
हर मैं के उस पार हूँ मैं !

न शब्दों में न मौन में, न समय सीमा में
उम्र के उस पार; रूह से रूह के संबंध में
एक पूरा आयाम हूँ मैं।

मुझ तक आना तो
जीवन उतार कर आना
क्योंकि एक गहन विश्राम हूँ मैं!

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28 NOV AT 2:42

I wish for those special wings
That could help me teavel to
The other shore of life

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26 NOV AT 1:11

कितने रावण हैं अब भी सीता की मर्यादा को नहीं लाँघते
कितने राम हैं अब भी अग्नि परीक्षा में मर्यादा को जाँचते
और न जाने कितनी सीताएँ लाँछन पर लाँछन सह जाएँ
युग बदले तो क्या बदला जब मानसिकता ही बदल न पाए

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17 NOV AT 23:17

बेवजह, बेमकसद जिए जाते हैं
ज़िदगी तेरे इल्ज़ाम पिए जाते हैं
हर रोज़ जीने की तमन्ना दिल में लिए
तलबगार मौत के हुए जाते हैं

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17 NOV AT 23:10

दुनिया भर की नफरतों से आज़ाद होने की चाहत है,
ज़िंदगी तुझे अब अलविदा कहने की हसरत है।

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17 NOV AT 18:46

आज भी नाम तुम्हारा है
सदियाँ, साल, मीलों के फासले
सब कुछ तुम पर वारा है

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13 NOV AT 2:32

अपने ख़्वाबों में जियेंगे
वो हर अधूरी प्यासी शाम
जो ढल न सकी तेरे बिना
जो शब भर जली मेरे साथ

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7 NOV AT 21:02

आसान ही होगा बातें बनाना
क्योंकि वो बेटी तुम्हारी नहीं है
क्योंकि वो हालातों से हारी हुई है
चाहे जितनी बातें बना लो ।

सरल है हँसी का पात्र बनाना
क्योंकि वो कुछ उलझी हुई है
क्योंकि वो तुम जैसी सुलझी नहीं है
चलो उलझनें तुम भी उसकी बढ़ा लो ।

आनंदित करता होगा किसी पर छींटे उड़ाना
जब तुम्हारे अपने सुखी हों घर में
जब किसी ने कुचले न हों उनके सपने
क्यों न तुम भी कुछ कीचड़ उछालो ।

मगर ये बात भूल न जाना
जीवन चार दिन का एक सफर है
कोई सफल है कोई विफल है
अंत तो तय था अंत तो तय है ।

न सोचना कहाँ किसको खबर है
वो लेख लिखता अजर-अमर है
अपने लेख जैसे चाहो लिखा लो
सफेद या स्याह जैसे चाहो रंगा लो ।

वक़्त एक सा कब किसका रहा है
आज तेरा भला है कल मेरा भला है
अना इतनी भी न मन में पालो
बस ये बात मन में अपने बिठा लो ।
-Meenakshi Sethi #Wings of poetry— % &आसान है कमज़ोर पर वार करना
किसी को गिरते देखकर हँसना
जो गिरते हुए को दे सके सहारा
हो सके तो खुद को इस काबिल बना लो ।— % &

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29 OCT AT 13:25

वो मुलाकात आखरी थी क्या पता था,
वो अधूरी बात आखरी थी, क्या पता था,
इन आँखों को इंतज़ार दे जो तुम चल दिए थे,
आँखों से आँखों की वो बात आखरी थी क्या पता था।

यूँ तो कई शामें रोशन हुईं थीं मेरी तेरी रोशनाई से,
मगर वो रोशन शाम आखरी थी, क्या पता था,
मेरे कई अंधेरे बुझाकर जो लौ जलाई थी तुमने,
वो लौ दूर फलक तक शाम रोशन करेगी क्या पता था।

तेरा आना एक मोज़जा था शक नहीं बिलकुल,
तेरा जाना भी मेरी हस्ती को देगा बदल, क्या पता था,
शाम फिज़ा में हो या सहरा में फ़र्क अब नहीं पड़ता,
तेरी यादों के साथ भी गुज़र जाएगा सफर क्या पता था।

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