2 OCT 2019 AT 5:31

किरदार बदलते रहते हैं
दुनिया के इस रंगमंच पर,
किरदार बदलते रहते हैं।
जीवन के इन पन्नों पर,
रचनाकार बदलते रहते हैं।
किस्से भी वही कहानियाँ भी वही,
बस उनको बयां करने के अंदाज़ बदलते रहते हैं।

कोई आया, आकर चला गया,
कोई जाने को तैयार खड़ा।
इन आने जाने वालों के,
मेले तो चलते रहते हैं।
बस हँसने रोने वालों के,
चेहरे बदलते रहते हैं ।

यहाँ भीड़ वही, भागम-भाग वही,
जाना है कहाँ कुछ पता नहीं।
अपनी-अपनी मंजिल छूने को,
सब सफर में हरदम चलते हैं।
मंजिलें भागती रहती हैं,
तलबगार बदलते रहते हैं।

दुनिया भी वही तमाशे भी वही,
कभी सही गलत, कभी गलत सही।
रीति-रिवाजों में जकड़े हुए समाज के ठेकेदार बदलते रहते हैं,
और सही गलत की परिभाषा के मेयार बदलते रहते हैं।
किरदार बदलते रहते हैं।
-Copyright 2019 Meenakshi Sethi, Wings Of Poetry








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