15 SEP 2019 AT 19:48

जहाँ ज़मीं सरहदों में बँटी न हो,
और आसमां की कोई हदें न हों।

जहाँ कोई आँख तरसती न दिखे,
और आँसू बस खुशियों के हों।

जहाँ दूरियों की मजबूरियाँ न हों,
और फासले सिर्फ गमों से हों।

जहाँ आज़माइशें तोड़ें नहीं,
और चलना कोई छोड़े नहीं।

जहाँ सच पर परदा न गिरे,
और झूठ की ख्वाहिश न हो।

जहाँ मोहब्बत को मोहब्बत मिले,
और नफरतों की जगह न हो।

नई दुनिया बनानी है...
अगर साथ मेरा तुम भी दो।

- Meenakshi Sethi #Wings of Poetry