20 SEP 2019 AT 1:17

जब एक-एक कर छिन रहे थे अपने,
जब तार-तार हो रहे थे सपने,
जब मन का विश्वास लगा डगमगाने,
जब संबल भी लगा लड़खड़ाने,
तब सोचना पड़ा...
जिंदगी आखिर तू क्या चली सिखाने ?

- Meenakshi Sethi #Wings of Poetry