जीवन के हर मोड़ पे जिनके, संघर्सों का डेरा रहता
फ़िर भी इनके अंतर्मन में, खुशियों का ही फेरा रहता
सदा हँसाते हैं ये सबको, कविता इनकी गहरी होती
दो शब्दों में सब लिख देते, रात में यूँ दोपहरी होती
एक अच्छे वक्ता के गुण संग, सुंदर सा व्यक्तित्व सजाते
लंबी कविता ना कह पाती,जो दो पंक्ति मे ये कह जाते
जीवन में दर्द है फ़िर भी ये, उस दर्द को हास्य कराते हैं
ज़ख्मों के छाँव तले रह कर, सबकी ये दवा बन जाते हैं
जीवंत हृदय, और शांत सा मन, इनका ये सुंदर गहना है
खुशियाँ आये, या आये ग़म, हरदम यूँ हसते रहना है
हम सबकी दुआ है उस रब से, हर मोड़ पे साथ रहें कान्हा
जीवन का चाहे जो क्षण हो, तुम संग बस साथ रहे कान्हा
दीर्घायु,स्वास्थ्य,और खुशियों संग,आजीवन बीते ये जीवन
जीवन की सभी परीक्षा में, बस जीत दिलाएं वो भगवान
जन्म दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ🌸 उमँग सर🎂🙂
ईश्वर आपको दीर्घायु एवं स्वस्थ जीवन प्रदान करे 😊🙌🙏
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है बनना इस धरा का पुष्प ,जो मुरझा के खिलते हों
जो ख़ुद हर बार उधड़े जाने पर भी,ख़ुद को सिलते हों
है बनना दास्ताँ वो जो बने सबके लिए मधुबन
हजारों पतझड़े आयें सजें खुशबू के ही सरगम
मुझे वो ज्योति बनना है, जहाँ आत्मा प्रकाशित हो
जहाँ सपने कई बिखरे, मग़र, आशा विराजित हो
मुझे निर्लिप्त बनना है, इसी जग में ही रह कर के
मुझे निर्भीक बनना है, सहस्त्रों जख़्म सह कर के
नहीं बनना मुझे कोमल कली , जिसको सभी तोड़ें
मुझे काटें सुशोभित कर , बाग़ का, शान बनना है
नहीं चलना मुझे उस राह जो, मुझ तक नहीं जाता
मुझे वट वृक्ष बनकर, स्वंय का निर्वांण बनना है.
मैं रहना चाहती हूँ, इस प्रकृति के, अंश में विस्तृत
मुझे ब्रह्मांड के हर जीव का, दृष्टांत बनना है
ये दुनियाँ भीड़ की महफ़िल मुझे एकांत बनना है
सभी को बनना परिभाषा, मुझे वेदांत बनना है..
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आशाओं की किरणों के संग,विजय मिले जीवन पथ में
सूर्य सा चमके नाम आपका, खुशियाँ छाए हर पग में
मिले वो मंज़िल जिसके सपने देखें आप ने बचपन में
पूर्ण होवे सब कार्य आप के, छा जाएँ हर जन जन में
लेखन के इस दुनियाँ में भी, नाम करें एक दिन अपना
रहे सुशोभित विजय भाल पर, हर जीत सजे जैसे गहना
सबका आशीष हो संग सदा, सबकी उम्मीद के ज्योति बनें
माँ बाप की हर उम्मीद बनें, भाई बहनों की प्रीत बनें
जिस लक्ष्य में आप को विजय मिले,उसको मन से स्वीकार करें
सबके हित में रत हो करके, एक योद्धा जैसा कार्य करें
सत् वर्ष से ज्यादा जीवन हो, हर खुशियाँ बरसे आजीवन
आचरण राम सा धारण कर, चरितार्थ करें अपना जीवन
बस यही कामना है, मेरी , इस शुभ दिन पर, शुभ शब्दों में
सम्मान मिले हर जन जन से, छाएँ अपनों के नयनों में 🙌
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कितना गहरा लिख जाती हो, तुम कोई सागर हो क्या
मन को भावुक कर जाती हो, ग़म की गागर हो क्या....
ओ मेरी प्यारी सखी, जब जब पढ़ने बैठती हूँ तुम्हें
हर शब्दों में तुम्हारे मैं ख़ुद के दर्द की पनाह पाती हूँ
तुम जब जब दर्द के एहसास सँजोती हो कलम से
मैं उन एहसासों में ख़ुद के दबे एहसास ढूंढ लाती हूँ
कितने शब्दों के इंद्रधनुष छा जाते हैं हर अल्फ़ाज़ में
मन को स्नेहिल कर जाती हो, प्रेम की नागर हो क्या....
खुश रहा करो, खुशियाँ अब ज्यादा ही लिखा करो
जो छोड़ जाए उसे भूल के, नये पथ पे बढ़ा करो
तुम अमूल्य हो ख़ुद में, यूँ किसी के लिए ख़ुद को ना भूलो
अपने लिये उपवन बन के, लता की खुशियों में झूलो
शाम की उदासिया नहीं, खुशियाँ बनो सहर सी तुम
सब के दिल में छा जाए जो, लगती हो वो पहर सी तुम
हर दिल में बिखेर देती हो, अपने शब्दों की महक को
सबके मन में बस जाती हो, मोह की चादर हो क्या.....
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वो यादों की बारात चली, बचपन की सारी रात ढली
कल तक जो खेल में बनती थी,वो आज हक़ीक़त होने चली
ये रस्म रिवाज़ों के मेले, लगते हैं फ़िर खो जाते हैं
हम एक पहर में क्या क्या बन,शामों की तरह ढल जाते हैं
बचपन बीता जिन बहनों संग, वो आज पराई होने चली
एक घर को सजाने के खातिर,कुछ अपनों से वो दूर चली
ये कैसा रीत विधाता का, बहने ही दूर चली जाती
भाई भाई तो पास रहते, बहनें क्यूँ सपना बन जाती
वो नये सजानें ख़्वाब चलीं, अजनबी देश के पनघट पे
बचपन और खून के रिश्तों को, करके वो पुरानी बात चली
कहना कितना आसान रहा, बेटियां पराई धन होती
बेटियों से कोई ना पूछे, रहना चाहें किस बगिया में
वो छोड़ पुराने संग साथी, एक नई धरा में रम जाती
पर मरते दम तक उनका दिल, बसता है पुरानी यादों में
ये प्रथा बहुत दुखदाई है, जिसमें अपने ही दूर हुए
जिन आँखों में बस खुशियाँ थी, उनसे करने बरसात चली
मौन अल्फ़ाज़
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ख्वाहिश के कुछ धागे बुनकर, सपनों के वो शहर चली
भोर हुआ ख्वाबों के घर में,दुःख की देखो शाम ढली
इतने दिन से देखी थी जो, वो हर एक सपने पूरे करना तुम
आए अगर कुछ मुश्किल भी तो,मन को व्यथित ना करना तुम
गाँव की गालियाँ, ताक रही है, निज सम्मान की आस लिए
उनकी मिट्टी महके कोसों,कोई चमके उनका सम्मान लिए
उम्मीदों की बाग़ सजे , हर डाल में फूल खिलाना तुम
जो हैं टूटे बिखरे दुनियाँ में, उनमें मधुमास जगाना तुम
स्नेह नेह का दर्पण बन, हर हार पराजित करना तुम
शासन में अनुशासन बन,बस जीत स्थापित करना तुम
मैं नेह संजोई इस मन में, तुम नित कर्मों से छा जाना
हर हार दमन कर के एक दिन,तुम अपराजिता बन जाना
मैं मौन से जग में शांति करूँ, तुम जीत के शोर मचा देना
मैं दर्शन बन विस्तृत होऊँ, और तुम इतिहास रचा देना
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गंभीर लेखनी के मालिक , हिंदी के शुद्ध विचारक हैं
है लेखन इनका गूढ़ बहुत, पत्थर में लगते पारस हैं
इनके लेखन में कुछ तो है जो अंतर्मन में बस जाता
हर शब्द गहन सा लगता है, हर पंक्ति है मन में रम जाता
इनकी अभिव्यक्ति ऐसी है, जो बंजर भूमि भिगो जाए
शब्दों का ऐसा मेल लिखें, जिनमें हर पाठक खो जाए
हर शब्दों संग ये न्याय करें, हर शब्द बनें जैसे मोती
इनकी कविता ऐसी होती, जैसे अँधियारे में ज्योति
हर कवि सूरज सा होता है,कविता होती है किरणों सी
और उनमें जो ख़ुद को लिख दे,वो होते हैं अनुपम छवि सी
उस काव्य अंश के हे प्रकाश,हो उज्ज्वल आप का लेख जगत
आप लिखते रहिये यूँ ही सदा,हों शब्द आप के ब्रह्म सत्य
अपने लेखन की शक्ति से, संचार संस्कृति का करना
एक सीख बने हर पंक्ति तेरे, शब्दों में वो जज्बा भरना
हे मानव तुम मानवता की, गाथा यूँ ही लिखते रहना
हिंदी और हिंद की संस्कृति को, निज शब्दों में विस्तृत करना
शब्दों की दुआ है शब्दों में, हर शब्द आप का छा जाए
हर कोई आप को पढ़ता रहे, तेरे शब्द सभी को भा जाए
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