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Manvi Verma Raman (Manvi Verma Raman©)

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Manvi Verma Raman 6 HOURS AGO

समेट चुकी हूँ खुद में तुमको इतना,
कि अब ख़याल भी तेरे मखमली कंबल ओढ़े;
बेसुध से पड़े रहते हैं ज़हन में इधर उधर...
कोई रोकता टोकता नहीं है उनको वहाँ,
बड़ी ऐश हो चली है उनकी...
क्योंकि तुम तो साँसों के साथ चलते हो मेरी,
तुम्हें अलग से सोचने की जरूरत
महसूस ही नहीं होती मुझे...
तुम्हारे ख़याल तो बस जैसे पहरेदारी कर रहे,
कि ये तुम कभी ये आरामगाह छोड़ के न जाओ...

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तुम और तुम्हारे ख़याल...
#तुम #ख़याल #इश्क़ #yqbaba #yqdidi #yqlove #poetry #hindi

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Manvi Verma Raman YESTERDAY AT 13:53

हवाओं ने कब्जा कर रखा है वहाँ,
हर कोने में पुरजोर पैठ बना ली है...
सांय सांय बस आवाज़ें आती हैं वहाँ से,
डरावना सा महसूस होता है अब वहाँ...
घुप्प अंधेरे में उस मरणासन्न सन्नाटे,
को चीरती हैं तो बस बेखौफ़ हवाएं...
बेरोकटोक आना जाना हो गया है उनका अब...
कोई आवाजाही जो बंद करना चाहे उनकी
दुश्मन बन जाती हैं ये...
सालों से रोशनी की एक किरण,
नहीं देखी उस कमरे ने...
वो भी अब डरती हैं शायद अपना,
खौफ़जदा चेहरा देखने से उजाले में...
तभी तो उफ्फ तक नहीं करते
दरवाज़े या उसके हत्थे भी अब...
सारे के सारे आदी हो चुके हैं,
उस डर के साये में जीने को...
और हवाओं का तो पूछना ही नहीं,
तानाशाही में अब मज़ा आने लगा है उन्हें..

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Manvi Verma Raman YESTERDAY AT 10:24

ऐ ज़िन्दगी तेरी आयतें हर जगह
बिखरी हैं चेहरे पर मेरी,
अब ये अलग बात है लोग इसे वहशीपन ही कहते हैं...

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Manvi Verma Raman 9 DEC AT 20:06

जुम्बिश-ए-लब यार के क्या कहने!
कि तमाम कोशिश कर चुके हैं हम;
ध्यान उनके लबों से हट भी जाए,
तो उनके तिल पर अटक जाता है...

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Manvi Verma Raman 9 DEC AT 12:28

उलझी उलझी सी कुछ बातों की,
समझ बस उन्हें और मुझे थी...
उलझे उलझे से हमारे दो दिलों की,
ये अधपकी सी कहानी है...
इसे सुनने और समझने की खातिर,
थोड़ा बावरा होना पड़ेगा...
दिसंबर की ठंड सा कभी ये,
रूह तक कंपा देगा...
तो कभी ये वसंत सा,
चारों ओर आपके खुशियां बिखेर देगा...
इतना आसान नहीं हमारी,
दास्तान-ए-मोहब्बत को सुनना जनाब...
ये आपको एक साथ सारे,
एहसासों से रूबरू करा देगा...
अपने दिल को थामना होगा आपको,
आंसुओं को अंदर ही समेट कर रखना होगा...
तभी इस अधपकी सी प्रेम कहानी का,
लुत्फ़ उठा पाएंगे आप...

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Manvi Verma Raman 8 DEC AT 7:13

तितलियों से उड़ते ख़्वाब देखे थे उसने,
पंछियों सा गगन चूमना चाहती थी...
वो लड़की भी बड़ी पागल थी;
जो सूरज की किरणों को,
अपनी मुट्ठी में कैद करना चाहती थी...
अरमानों का भंडार था पास उसके,
उन सबको वो जीना चाहती थी...
इश्क़ में पड़ गई वो अब लगता है...
तभी सारे सपनों का गला घोंट वो,
बस उसके संग जीना चाहती है...

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Manvi Verma Raman 8 DEC AT 6:25

सम्भलते सम्भलते हम यहाँ तक आ गए...
हाँ तुम्हारी यादों से दूर हो चुके हैं,
हम ये मन को भरमा गए...
पर यादों की धुंध आज भी छा जाती है,
तब असलियत मुँह चिढ़ाने आती है...
अरमानों के पंख भी फड़फड़ाते हैं...
जब कदम तुम्हारे वापस,
इस शहर में पड़ जाते हैं...
एहतियातन सारे दरवाज़े बंद करती हूँ,
मैं फिर से दिल के...
पर कहीं न कहीं एक सुराख़ रह ही जाता है...
और मैं फिर दिल की बर्बादी की ओर कदम बढ़ाती हूँ...

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Manvi Verma Raman 7 DEC AT 22:34

सौदा ही है गर ये तो यही सही,
पर तेरे दर पर ही आखिरी साँसें लूंगा
तू अब ये माने या नहीं...

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Manvi Verma Raman 5 DEC AT 21:08

तुम्हारी यादें जो उतने सालों में इकठ्ठा की थी
खर्च हो गयी धीरे धीरे...
इतने सालों में कोई मुलाक़ात भी
तो नहीं हुई थी हमारी...
यादों से घिरी थी तो बेफ़िक्र थी
पर अब वापस तन्हाइयों के शोर
मुझे डराने लगे हैं...
बातें तो कभी कभार हो ही जाती हैं
पर मुलाक़ात के बाद जो;
तुम्हारे चेहरे का अक्स मुझसे लिपट जाता था
वो एहसास ही अलग था...
अब तो वो भी दामन छुड़ा रहा मुझसे...
आ जाओ इक बार और रोक लो इन सबको...
कि बस इक छोटी सी मुलाक़ात हमारी
अमृत की बूंदों सी हैं;
इन गायब होती यादों के लिए...
ये जी उठेंगी फिर से, मेरे दिल का वो कोना
फिर से गुलज़ार हो जाएगा...
मोहब्बत न सही, दोस्ती की ख़ातिर ही
इस मरते हुए को ज़िंदा तो कर ही सकते हो तुम...

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Manvi Verma Raman 23 OCT AT 10:28

बड़े ही ख़ुलूस से मिले वो इस बार हमसे
डर लग रहा कि कहीं
दिल तोड़ने का इरादा तो नहीं उनका...

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