जिसकी रगों में बहता इश्क का बयार हैं
वही तो प्यारा दुलारा अपना बिहार हैं
जिसे मिला कोसी का शाप और गंगा का ताप हैं
लोकतंत्र की गुर सिखाने वाला वह अपना बिहार हैं
छठ यहाँ पर्व नहीं लोक आस्था का संगम हैं
जिस ख्याति का विश्व पटल पर उड़ रहा विहंगम हैं
इस महापर्व की महत्ता को आज सभी ने जान लिया
हमारी त्योहारों ने अब वैश्विकता का सम्मान लिया
उगते सूर्य का वन्दन करना हमें वेदों ने बतलाई हैं
डूबते सूर्य का पूजन कर हमने श्रेष्ठ उपलब्धि पाई हैं
नवादा से न्यू जर्सी तक इसकी धूम मची हैं
बेगूसराय हो या बोस्टन की यही कहानी सच्ची हैं
त्याग तपस्या और श्रद्धा का उमड़ता इसमें ज्वार हैं
इसलिए यह बिहारियों का सबसे प्रिय त्यौहार हैं
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That day you start fretting about future,
Is the you leave your childhood behind.-
यादें तेरी मुझे इस तरह घायल कर गई
हलचल दिल में पावंँ की पायल कर गई
मैं भूल चुका था रास्ता महबूब की गली का
अदाएं तेरी मुस्कुराने कि फ़िर से कायल कर गई
यह किस तरह की दिवानगी हैं तेरी झुल्फों का
जिसकी इन्तजार में कितनी शामें गुजर गई
थक चुकि हैं आँखें जिसकी चाह में अब तक
उसकी महरुमीयत मुसाफ़िर को बेघर कर गई-
उसकी कदमों की आहट को पहचान लेते हैं
ऐ जिन्दगी तुझे दूर से ही जान लेते हैं
किस क़दर बेबसी हैं इन पथराई आँखों में
हम तो बिछड़े हुए को भी अपना मान लेते हैं
खुशियां यूं रुख़सत हुई मेरी दहलीज़ से
अब गम भी मेरा इम्तिहान लेते हैं
लाजिम नहीं अब हर वक़्त मुस्कुराना
मुसाफिर की यादें दिल में उफ़ान लेते हैं
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वह हिंदुकुश वह सिन्धु घाटी की मैं शोभित बिन्दी हूँ
दास्तां की दीवारें तोड़ मैं अमिट वह हिन्दी हूँ
भारतेन्दु की लेखनी ने किए जिसके यशगान
जिसकी जरिये मसहूर है मीरा, सुर और रसखान
पन्त की गुंजन, विणा, और दिनकर की हुंकार हूँ मैं
राणा की भाला , पृथ्वी की बाण और मनु की तलवार हूँ मैं
दुनिया के सारी भाषाओ की मैं एकमात्र बिंदु हूँ
सब मुझसे ही बने है , इसलिए मै धर्मो में हिन्दू हूँ
सत्य , सरलता दोनों कंधे है मेरे मैं ऋषियों में वेदनिंदि हूँ
ताल लय सुर छन्दों से सज्जित वह भाषा मैं हिन्दी हूँ
मैं मातृभाषा हूँ हिन्द की हिन्दवासी हैं मेरी सन्तान
कालजयी रचनाओं से बढ़ाए हैं मेरी मान
स्मृतियां न शेष मात्र हैं मैं धरा की जीवट उदाहरण हूँ
मैं शीतलता में हिमालय और नदियों में कालिंदी हूँ
इस धरा पर गुंजित वह श्रेष्ठ भाषा मैं हिन्दी हूँ-
If you want to success in your life.
So always ready for worse condition.-
मत कहो आसान इसकी बड़ी कीमत चुकाई हैं,
सैकड़ों वीरों ने इसके लिए सीने पर गोली खाई हैं।
कितनों ने बचपन दे डाला कितनों ने जवानी दी,
दम्भ गुलामी का तोड़ने माँओं ने भी कुर्बानी दी।
कुछ ने तो अपने जीवन की ही आहुति तक दे डाली
वे झूल गए फाँसी फन्दे पर जैसे कोमल फूलों कि डाली
तब जाकर कही हमने यह आजादी पाई हैं
वर्षों के संघर्षों के बाद यह सु-अवसर आई हैं
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तेरी यादों की बारिश मुझे अक्सर भिगाया करती हैं
तेरा ख्वाब मुझे रातों में सताया करती हैं
गम भी कर लेता हैं मुझसे किनारा यू हीं
बस तेरा ख्याल दिल से नहीं जाया करती हैं
सिर्फ मैं ही क्यों दु तुम्हें सफाई अपनी
तू भी तो मुझे न कभी मनाया करती हैं
कब तक मैं समेट कर रखूं इन पलों को अकेले
मेरी किस्मत भी मुझसे अक्सर रूठ जाया करती हैं
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आज कुछ फिर पुराना याद आया, एक भूला तराना याद आया
घर की छत पर वो धूप जाड़े की,बारिशों में नहाना याद आया
कितने अच्छे थे दोस्त बचपन के, उनके घर रोज जाना याद आया
मौज मस्ती वो आवारागर्दी, घर में फिर डांट खाना याद आया
गर्मियों की भरी दुपहरी में, बाग से फल चुराना याद आया
रोज लगती थी ताश की बाजी, हार कर मुँह फुलाना याद आया
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वो चाय रखी हैं टेबल पर इतवार पुराने ले आओ,
हम कह देंगे कल छूटी हैं तुम यार पुराने ले आओ...-