हां तू ही दरिया, तू दरख़्त भी है,
यूं रुकसत करना आपका सदी का शून्य है।
अदाकारी से हर बार अंतर्मन को सुकून आया,
पर इस अंतिम कारवां से पसरा चारो तरफ उदासी का साया।
तेरी निजी ज़िन्दगी के यूं तो चर्चे मंद थे,
पर इस मौत के जिक्र-ए-आम हैं।
"मां बुला रही थी" जाना शायद जरुरी होगा,
आसमान उसका विशाल, जमीन का विस्तार काम रह गया होगा।
इस जहान का मजहबी बैर, उसके जमीर से छोटा रह गया,
कहानी ही थमी है उसकी, किस्सों का शोर होगा
सूबेदार साहब की रूह पहले से रुहानी, जन्नत भी खुशनसीब होगा।
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हां तू ही दरिया, तू दरख़्त भी है,
यूं रुकसत करना आपका सदी का शून्य है।
अदाकारी से हर बार अंतर्मन को सुकून आया,
पर इस अंतिम कारवां से पसरा चारो तरफ उदासी का साया।
तेरी निजी ज़िन्दगी के यूं तो चर्चे मंद थे,
पर इस मौत के जिक्र-ए-आम हैं।
"मां बुला रही थी" जाना शायद जरुरी होगा,
आसमान उसका विशाल, जमीन का विस्तार काम रह गया होगा।
इस जहान का मजहबी बैर, उसके जमीर से छोटा रह गया,
कहानी ही थमी है उसकी, किस्सों का शोर होगा
सूबेदार साहब की रूह पहले से रुहानी, जन्नत भी खुशनसीब होगा।
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Meanwhile police be like :
Doodh manogoge to kheer denge,
Ghar se nikle to gaand Tod denge.-
पहुंचने पे घर, प्यार जरा जता देना,
मां थक गई होगी शायद, हाथ बटा देना।
बहुत सालों से लगी हुई है निः स्वार्थ घर को घर बनाने में,
अब जो सब इकट्ठा हुए हो तो, मां को भी feminism समझा देना।-
What you gonna do? What you gonna say?
Where you gonna hide when you see those flashing lights?
Where you gonna run? Where you gonna turn?
When they catch you slipping by surprise
What you gonna do? What you gonna say?
Where you gonna hide when you see those flashing lights?
Where you gonna run? Where you gonna turn?
When your life flashes before your eyes
Run, run for your freedom
Better run, run you don't wanna see the kingdom
Run, run if you wanna see the sun
We don't wanna lose another one
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ना जाने क्यूं अजीब सी बेचैनी सी हो रही है,
मन लग नहीं रहा काम पे, दिल घबरा सा रहा है,
शायद क्यूंकि इन हालातो में भी बाप बाहर जा रहा है।
उनका जाना भी जरूरी है, बहुत लोगों का इलाज़ करना है,
लोगों को आस है उनसे, बाहर भले ही कोरोना है।
We salute such souls.thank you for your services.
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झरोखे से देख रहा था, अपने ही घरोने को जलते हुए,
की कुछ नकाबपोश आए थे, हाथों में लहू मलते हुए।
उन्हें क्या पता कितनी दुआ लगी थी आने में उस आंख के तारे को,
वो बाप कुछ भी ना बोल सका, अपने लाल के हत्यारों को।
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कुछ रूठी हुई लग रही थी ,
लगा किसी से खफा होगी।
बिना बताए चली गई वो,
शायद मेरी ही खता रही होगी।
अगर पता होता जा रही हो,
तो रोकने की कोशिश तो करता ।
अब जो तुम यूं गई हो,
तुम्हारी भी अपनी वजह रही होगी।
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