Maddy   (Maddie_love)
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Joined 10 February 2019


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Joined 10 February 2019
30 OCT 2022 AT 10:58

कुछ तो दर्द हुआ होगा उसे भी हमे छोड़ते समय
पत्थर का ही सही दिल तो था सीने में
दूर रहता था तो रोती थी सिसक-सिसककर
एक आँसू तो सच्चा होगा उसकी आँखों मे
समझ न पाया उस खेल को जो हुआ मेरे साथ
काश उन जैसा ही कोई आ जाये उनकी जिंदगी में

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30 OCT 2022 AT 10:39

नादान है जमाने के लोग
जिंदगी भर कांटोंसे बचकर चलते है
नहीं जानते कि
हर गहरा-सुनेहरा जख्म तो फूलोंसे मिलता है

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15 MAY 2022 AT 16:08

कूछ नजर का कमाल था
कुछ थी नजारे की जादूगरी
अगर ये भी बेमतलब था ।।1।।
तो सब बेमतलब था
कुछ नादानी हमारे दिल ने की थी
कुछ जुर्म तुम्हारी अदाओंका भी था
मगर इश्क़ के सामने ये सब बेमतलब था। ।।1।।
तुम्हारी उड़ती जुल्फों को देख मचलने लगा
तो आपकी मुस्कुराहट देख के संभलने लगा
सांसे लेना तो अब बेमतलब ही था। ।।1।।
उनकी आंखों में रब का ठिकाना नजर आ रहा था
उनकी बाहों में जन्नत नजर आ रही थी
अपनी जिंदगी के बारेमे सोचना
अब बेमतलब लग रहा था। ।।1।।— % &

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13 FEB 2022 AT 21:24

कुछ खुशी तेरे आनेसे हुई है
कुछ दिलको मेरे चैन मिला है
जितनी गुजरी जिंदगी तेरे बिना
ना गवार गुजरी बस येही जिंदगी का गिला है
ना आये कभी तेरे आंखोसे आंसू
न रहे कोई ख्वाइश तेरी अधूरी
क्योंकि तेरे आनेसे ही मुझे मेरा रब मिला है — % &

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5 FEB 2022 AT 7:26

जो खेल तुम खेलने की कोशिश कर रहे हो
उसके मंजे हुए खिलाड़ी आज भी हमसे तालीम लेते है— % &

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24 JAN 2022 AT 20:36

केहेनेको बस वही दो बातें
न वो सुनें न हम सुनाते
आँखों मे था समंदर
अल्फ़ाज़ थे कम हमारे अंदर
प्यार तो है सातों जहां का
बस पता नही कैसे है जताते

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23 JAN 2022 AT 22:50

कुछ याद करलूँ कुछ भूल जाऊ
बिता हुआ लम्हा कैसे लाऊ
मुस्कुराते हुए देखते है सब मुझे
अपने अश्क़ किसे और कैसे दिखाऊ
आई है रात गहरी सन्नाटा लेकर
जो दिन भर साथ देती थी
वो परछाई राज सुनाने कहासे लाऊ

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23 JAN 2022 AT 22:43

लम्हा बीत जाने के बाद
बोली हुई हर बात
बोल देने के बाद
रुसवा भी हो तो कैसे
हर कोई अपनाता है
पराया कर देने के बाद

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13 JAN 2022 AT 19:12

जिंदगी एक मुशायरा बन गयी
जिसकी जितनी समज़ थी वैसा जुमला सुना गया
हर पल ने लिया इम्तेहां यहां
कोई साथ खड़ा न रहा हर कोई अपना सहारा जाता गया

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2 JUN 2021 AT 20:37

हँसा जा रहा हूँ बेमतलब
जिंदगी का कुछ ठिकाना नहीं मिल रहा
दिल सीने की दीवारों पर पटक रहा है सर अपना
इसे कोई किनारा नही मिल रहा
जिंदगी रो रही है मुद्दत से
इसे कोई सहारा नही मिल रहा
तू भी तो अंजान है मेरे हर दर्द से //२//
पुकारना चाहता हु तुझे दिलो-जान से
पर तुझे किस नाम से पुकारू
वो नाम नही मील रहा....

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