जिसे याद रखने की आवश्यकता नहीं,जिसमें असत्य जैसा संशय व ग्लानि नहीं,जिसे कहने में ही राहत है रही। -
जिसे याद रखने की आवश्यकता नहीं,जिसमें असत्य जैसा संशय व ग्लानि नहीं,जिसे कहने में ही राहत है रही।
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