Khushi Yadav   (ऊर्जा के किताब से...खुशी)
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Joined 18 February 2020


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6 APR AT 19:54

मुझसे आ टकराई
एक नए लहर को संग लिए,
बोली भी कि
तुमसा प्यारा कोई नहीं,
तुम कोई तारा भी नहीं जो यूँ टूट जाओ
तुम खुद में एक चांद हो
चमकना कोई तुमसे सीखें!!

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2 APR AT 15:45

सब भूल रही हूँ
बाकी कुछ रट सी रही हूँ
गोद रही सफेदी पन्नो पर,
आईने में काफी जच़ भी रही हूँ
बस तरह तरह से हंसी सीख रही हूँ
और थोड़ा ज्यादा की क़ोशिश में हूँ....

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2 APR AT 15:37

रातें सब सूनी झलकती है
वादे भी सारे चिढ़ाते उड़ भागते है
कशमकश वाली सभी राह दिख चलती है
उन पलों में ठहरती है, उन बातों में खुद उभरती है
चुभन सी महसूस करा चांद की तरह
अपनी तारा से बड़ी दूर वो पल ले जाते हैं...

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29 MAR AT 8:53

रंग भरा महौल हैं
चारों ओर रंगों की आज बौछार हैं,
हवा में अलग सा कुछ जोश हैं
आज के दिन कुछ नया सा लहर हैं
होली के बोल गाते यूँ पवन हैं
रंगों में डूबे हम कुछ बावरें हैं..

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26 MAR AT 10:20

अपना एक दिन आएगा बड़ी दूर से आएगा,
रोशनियों की जगमगाहट के बीच से फिर हमारा नाम गूंजेगा...

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22 MAR AT 10:26

क्योंकि तुम सभी से हटकर हो,
सभी से थोड़ा बढ़ कर हो,
आग हैं तुममें जो मैंने हैं देखी,
तुम्हारे इसी आग से मैंने तुमसे सब सीखा,
साथ रहने का यूँ मतलब मैंने जाना,
गर्व करने का तुमपर तुम्हारे जज्बातों
ने कराया...

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14 MAR AT 12:53

मेरे आज का भागता चिढ़ाता यह वक्त!!

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10 MAR AT 8:48

लेने दो थोड़ा मज़े
कुछ ही तो समय हुआ है
खेलने दो अभी मुझे
यह अभी मेरा इलाका है
ज़रा डूबने दो थोड़ा और मुझे
सड़क आज यह मेरी हैं
यह सूकुन ही मेरे लिए सब हैं
समझो ना माँ तुम भी
खेलने दो आज जी भर के मुझे...

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5 MAR AT 19:32

देखना तुम ना ढलना
देखना कहीं तुम ना खोना..

जो डूब गया उसका इंतज़ार मत करना,
कल की सुबह से पहले तुम खुद को संभाल लेना,
वक्त को अबकी बार यूँ ना गँवा देना...

ऊँचाइयों को पाने से पहले ज़रा खुद को सवार देना,
बहुत कुछ पाने के लिए चलो कुछ यूँ ही गँवा देना..

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5 MAR AT 7:30

हर लम्हों से याद यूँ किस्से कुछ..

काली रात के पक्के यार हम,
बैठे थोड़ा दूर भीड़ से खुद से बातें कर हंसते हम..

अकेले में खुद से डराती यह रातें हैं,
सूकुन ही सूकुन बतलाती फिर इस की रोशनी हैं...

रहते रहते अटपटा सा कर्जदार बना दिया इसने,
कुछ पारदर्शी कर्ज देकर सब समझ थोड़ा सा छिपा लिया हमें...

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