Khushi Yadav   (ऊर्जा के किताब से...खुशी)
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Joined 18 February 2020


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29 NOV AT 21:47

बहुत हैं
खुद से ज्यादा सबसे ज्यादा
क्योंकि मेरे लिए आप मार्गदर्शन देने वाली बूत हो
माफ़ कर देना आप अगर कुछ कम ज्यादा निकल गया
मुख से मेरे...

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28 NOV AT 13:51

थोड़ा मुश्किल लगेगा
मगर तुम चलते रहना
उस राह से सीखते रहना
सुना है ना तुमनें रात के बाद सुबह आती हैं
यहीं सोच तुम हौसला रखें बढ़ते रहना
आगे पीछे की ना सोच तुम
अब को लिए डोलते रहना
यहीं डगमग राह तुम्हें जीत मुक्कमल कराएंगी...

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24 NOV AT 22:58

थोड़ी सी रोशनी काफ़ी हैं अंधेरे पर रौब जमाने के लिए
दिल को सही डगर समझाने के लिए..

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24 NOV AT 7:23

हलचल सी राहों नें शांति को पनाह दिया
कुछ सुनकर बेपनाह सा प्यार किया...

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23 NOV AT 18:59

लाचार लकिर हाथ में लिए
दृढ़ संकल्प वो खुद से किए
समझौता कर बस्ते से वो
दो रोटी से मिलने फिर चली
मस्ती सें हाथ बटाने....

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23 NOV AT 18:28

सजाएं कुछ सपने हैं कुछ अरमान हैं
देश के लिए थोड़ा ज्यादा खुद के चुटकी भर
मिट्टी से बने इस शरीर को वीर बनाना हैं....

वर्दी सजानी हैं सीना चौड़ा करवाना हैं
कुछ के लिए बिलकुल नहीं बस सही के लिए
बड़े चाव से बनठन के छोटे मोटे से कुछ ऐसे दृश्य बनाए हैं...


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23 NOV AT 3:56

आज मैंने सांसों को किसी के बहुत करीब से महसूस किया हैं,
दिल से जुड़ा कुछ मेल सा लगा है तभी तो उसके सांसो से सुकून कुछ मैंने भी भरा है....

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23 NOV AT 3:48

बदनाम सा बावरा सा थोड़ा अजीब सा
सबको बस उदास या खुद पर सोचने पर मजबूर करने
वाली पंक्ति हूँ,

कविता हूँ मैं असफल सा पुरा होकर भी आधा
आधा होकर भी खुश पर देती सिर्फ तन्हा का कारण..

लुट जाने को पागल कुछ टूट जाने पर मौन
कविता ही हूँ शायद पर जिद्दी परिंदे से कम नहीं...

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23 NOV AT 3:40

मन की क्या अलग महफ़िल बनी हैं देख के उनको सब भूल बैठी हैं,
सुकून सा समझ सिर्फ आँखे पढ़ सब कुछ सुनते यूँ जा रही हैं...

खुद से दूर पास किसी के संग जमाने बिताने चल पड़ी है,
हक़ में क्या है क्या नहीं कुछ नज़र ना रखें खुद से रूठने को उतारूँ मन
ना जाने क्या करती जा रही हैं...

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22 NOV AT 12:43

Try again on your failure don't let this opportunity go,
Build your thoughts brave to make your way for a good day....

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