Jayshree Rai   (जयश्री राय"सांकृत्यायन")
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Joined 23 August 2020


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Joined 23 August 2020
10 JUN AT 11:29

पावन धरा बनाने को ,हर बेटा फिर से राम बने,
नाश बैरियों का करने को गोकुल का घनश्याम बने।
जो भी जंग लड़ेंगे हम,जीत हमारी निश्चित है,
गर भारत माँ का हर बेटा अशफ़ाक,हमीद, कलाम बनें ।।


- संकल्प अनुसंधान योगपथ

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26 MAY AT 11:15

जीवन का पहला संकल्प,
सबसे पहले काया-कल्प।
पहला सुख निरोगी काया,
दूर रखिए प्रपंच और माया।

नित योग और प्रार्थना करिए,
लक्ष्य के लिए जागते रहिए।
मन,कर्म,वाणी रखें पवित्र,
मोती सा चमके चरित्र।।

- संकल्प अनुसंधान योगपथ

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4 MAY AT 8:33

समाधान का अंग बने हम
या फिर बनेंगे हम स्वयं समस्या
भूल से करली तू-तू मैं-मैं तो,
हम बन गये एक विकट समस्या

क्यों, कब, कैसे,कहाँ, कितना,
पंच ककार कहलायेगा।
चाहे जितनी विकट समस्या,
समाधान तुरन्त मिल जाएगा।।

- संकल्प अनुसंधान योगपथ

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25 APR AT 17:50

अब प्रकृति इंसान को चेतावनी एक साइरन एक समन के रूप में दे रही है, किन्तु इंसान ईमान को ताख़ पर रखकर काम,क्रोध, मद,लोभ के वशीभूत होकर नाना प्रकार के प्रपंच में लिप्त है, और उच्चश्रेणी के पशुवत जीवन का अनुशरण कर रहा है। मात्र प्राथमिक शिक्षा की प्रार्थना और नैतिक ज्ञान को मानक मानकर अपने अन्दर झाँके और तत्काल आत्म सुधार करने के लिए संकल्पित हो जाय अन्यथा यह 21वीं शदी मानव सभ्यता का अंत कर सकती है।मानवहित में अपने क्षमतानुसार एक अनुकरणीय संकल्प अवश्य लें।
एक विनम्र आग्रह🙏 - संकल्प अनुसंधान योगपथ

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2 APR AT 7:48

निष्ठुरता की सीपी में पलकर,
संघर्षों का सम्मान करो।
महत्वाकांक्षा का मोती बनकर,
प्रकृति का वरदान बनो ।।

- संकल्प अनुसंधान योगपथ

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28 MAR AT 13:35

चलो इस रंगों कि महफ़िल में हम भी डूब जाते हैं,
गुलालें प्यार की सबको ,दुआ का रंग लगाते हैं।
रहें या ना रहें उस बार होली खेलने को हम,
चलो इस बार हर गम भूल कर होली मनाते हैं।।


- संकल्प अनुसंधान योगपथ

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10 FEB AT 9:34

धनवान से बड़ा धैर्यवान ,जिसे अमीर कहते हैं।
स्वाभिमान के लिए घास की रोटी,इसे ज़मीर कहते हैं।
इंसानियत के लिए जो मर मिटे ,उसे फक़ीर कहते हैं।
मनुष्य जन्म पाकर मनुष्यता अपनाना, इसे ही तकदीर कहते हैं।।

- संकल्प अनुसंधान योगपथ

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23 DEC 2020 AT 19:22

।। परमपिता परमेश्वर ।।

तुमने दुनिया बनाया जमाना बनाया,
रहने का हमको ठिकाना बनाया।
फिर भी दिल पूछता है हमेशा मेरा,
तुमने रहस्यों का कैसे खजाना बनाया।।

कोई हँसता नहीं कोई रोता नहीं,
मन सत्य की सरिता से धोता नहीं।
कैसे रची तुमने दुनिया की रचना,
जो दिखता है अकसर वो होता नहीं।

तुम्हीं ने बनाया सच्चाई यहाँ पर,
झूठ और बुराई अच्छाई यहाँ पर।
हँसना बनाया, हँसाना बनाया,
ना दिखने का तुमने बहाना बनाया।
पूछता है हक़ीकत को दिल आज तुमसे,
बिन दिखे सबको कैसे दीवाना बनाया।।
- संकल्प अनुसंधान योगपथ

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11 OCT 2020 AT 13:43

रुको मत,आगे बढ़ते रहो,
जरूर पूरी होगी तुम्हारी चाह।
तुम कर्म करो,कठोर मेहनत करो,
बस यही है प्रकृति की सलाह।
कभी भाग्य के करिश्में को मत देखना,
नहीं तो ना कभी मंजिल दिखेगी,
ना कभी राह।


- संकल्प अनुसंधान योगपथ

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5 OCT 2020 AT 15:52

दोषारोपण और रोना धोना,
यह साहित्य का मूल्य नहीं।
जो चट्टानों से लड़ना सीखे,
सचमुच है मानव तुल्य वही। उठो जागो और भागो,
इस प्रगति के मैदान में।
यही सीखा हमनें प्रबुद्ध जनों के
लहू,त्याग और बलिदान से।।


- संकल्प अनुसंधान योगपथ

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