5 AUG 2020 AT 21:47

ये जो मोहब्बत है.
ये जो मीठा मीठा सा दर्द होता है,
जिस्म अलग सा पर जान एक सी लगती है,
तुम में मैं ओर मुझ में तुम दिखते हो,
बात कोई ना हो फिर भी बात उसी की ही होती है,
जीसके जिक्र से दिल थम सा जाता है,
ना रातों को निंद ओर दिन मे चैन आता है,
यही तो मोहब्बत है,
जो इन्सान को अपने भीतर रहे इन्सान से मिलाती है.
हेमांगी

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