यादें पीछा करती है.
यादें पीछा करती है ,
बेमतलब के सवाल करती है,
ना रात को सोने देती है,
ना दिन में चेन की सांस लेने देती है,
यहां वहां उछला करती है,
कभी कभी तो खूदकें अंदर गूम कर देती है,
ये यादें ना थकती है ना ही हारती है और ना ही रूकती है.
हेमांगी-
19 JUN 2021 AT 19:54