23 MAY 2020 AT 7:56

यादे बेसुमार होती है
कुछ किताबो के पनौ मे सिमट जाती है
अरसो के बाद यादे टटोलती है
किताबो के पनौ से नीकल कर सामने आ जाती है
आखो के नीचे , दिल के कोने मे रखा हुआ
कोई रीश्ता फिर से जीन्दा कर जाती है
ये यादे बेसुमार होती है.
हेमागी

-