"वो" कुछ इस कद्र मुज्में समाया है की,जब जब आईना देखती हूं हर बार "वो" ही "वो" नज़र आता है.हेमांगी -
"वो" कुछ इस कद्र मुज्में समाया है की,जब जब आईना देखती हूं हर बार "वो" ही "वो" नज़र आता है.हेमांगी
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