वो भी क़्या एक रिश्ता था...,
ना कभी कोई नाम दीया था ,
ना कभी देने का सोचा था,
फिर भी वो रूह से जूडा था,
उम्र भर साथ रेहना का वादा तो नहीं किया था,
पर वो साथ हमेंशा रहे वो ही हरदम चाहा था,
अच्छा लगता था बाते करना ,साथ में हँसना,
पर वो "पर" पे हीं कहीं अटक सा गया था,
वो एक रिश्ता मेरी रूह से जूड़ा था ,
ना कभी उसने मुझे बांधा था
ना कभी मैं आज़ाद हो पाई थी,
जो था यक़ीनन वो बेहद खास था,
वो मेरे पास ना था फिर भी सुकून सा एहसास था.
हेमांगी-
16 OCT 2022 AT 15:53