28 APR 2022 AT 9:45

वो आहिस्ता आहिस्ता आगे बढ रही थी,
न जाने कोन सी जल्दी उसे पड़ी थी,
हम सोच रहे थे ,
वो कुछ वक्त हमारे पास ठहरेगी,
धीरे से आकर हमे गले लगायेगी,
पर ना ये रुकी, ना ही कहीं ठहरी,
ये "उम्र" वक्त के साथ मेरा हाथ छोड़ कर के अपने रास्ते चलती रही.
हेमांगी

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