1 JUN 2020 AT 23:41

विदा कर.
वो हर एक लम्हें को,
वो हर एक इन्सान को,
जो कभी कहीं तुजसे जुडा था,
तेरी रूह मे बसे उस यकीन को तोड़ना चाहता था,
की तुम कभी कुछ नहीं कर पाओगे,
उस हर एक गलतफहमीयो की गठरी को विदा कर दिया.
खवाब थे,
खवाब मे कहीं तुम भी थे,
हर एक सांस मे तुम्हें जीया था,
तु रुठा था,फिर भी मेरा यकीन नहीं तुटा था,
इन आंखों को,आंखों मे बसें हर एक खवाब को,
जो चिख चिख कर मुझसे कहता था,
फिर से वो खुशनुमा दिन आऐंगे,
फिर से वो सारे खवाब सजेगे,
यकीनन दिल पे पथ्थर रखके विदा कर दिया उन खुबसूरत धोखे को.
हेमांगी

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