तुुम्हारी बांहो का घेरा.
बहोत सी बातो में जब कभी में उलझ जाती हूं,
जब अपनी सोच की दौड़ से थक जाती हूं,
जब कभी मुझे सूकुन की चद्दर तले खो जाने का मन मचलने लगता है,
तब तुम्हारी बांहों के घेरे में मैं पीघल जाती हूं,
और थोडी ज्यादा सवर जाती हूं.
हेमांगी— % &-
12 FEB 2022 AT 17:18