तुमको देखे हुए ज़माना हुआ,
बिती बातों की उन गलीओ मे गुजरे बहुत वक्त हुआ,
ऐक वक्त था जो कभी ठहरता ही नहीं था,
और एक आज है जो हम लम्हों में बटे हुए हैं,
सबकुछ बिखरा बिखरा हुआ है जेहन में,
फिर भी इन निगाहों में एक आस हैं,
कभी तो ये इन्तजार खत्म होगा,
तुम्हें देखने का जमाना लौटेगा.
हेमांगी
-
24 MAY 2020 AT 0:02