29 JUN 2021 AT 21:20

तुम्हें छूकर देखना है.
एक अरसा हो गया तुम्हें देखे,
तुम्हें सुने,महेसूस कीये,
आज जब तुम सामनें आये तो बरसो से जमी हुई यादों नें करवट़ ली,
कुछ हलकी सी दिल में चुभन भी हूई,
और आँख से इश़्क की बारीश होनें लगी,
तुम्हें छूकर देखना है की तुम वहीं ही हो की कोई और जो वक्त के साथ बदल गये ओर पलट कर लौटे ही नहीं.
हेमांगी

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