28 MAR 2022 AT 9:42

तुम समझते क्यों नही.
अब ना वो वक्त रहा है,
ना अब तुम वो पुराने वाले रहे हो,
जो बाते हमें जोडती थी एक दूजे से,
उसके धागे से तुमने रिश्ते को तोडा है,
मानां की तुम फिर से लौटनां चाहते हो,
पर क्या तुम मेरे तुम्हारी पीछे बिते उस वक्त को मुझे तुम लौटा सकते हो!
जगी हुई वो हर रात मेरी तुम सुला सकते हो!
मेरे भीतर कुछ बदल सा गया है ,
कुछ टूटसा,कुछ बिछड सा गया है,
तुम समझतें क्यों नही!
अब वो इश़्क भी कहीं खो सा गया है.
हेमांगी

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