21 JUN 2020 AT 17:10

तुम क्या जानो.
तुम क्या जानो दिल की महफिल कब से सजाऐ बैठे हैं,
आंखों में पानी और होठों पर मुस्कान सजाऐ बैठे हैं.

चले आना वक्त रहते हमारी दहलीज़ पर,
दिल के अंधेरे रास्तों पर हम शमा जलाऐं बैठे हैं.

आता जाता हर वो एक शख्स पुछता है अपनी निगाहों से,
किसके नाम की महेंदी लगाए ,पलकें बिछाऐ बैठे हैं!
हेमांगी

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