टूटे पत्ते कि तरह बिखर गए हम,
सांस है फिर भी जिंदा नहीं हम,
कुछ इस कदर चुभा है सीने में,
इन्सान हो कर भी पथ्थर के बन गए हम.
हेमांगी-
30 APR 2020 AT 16:24
टूटे पत्ते कि तरह बिखर गए हम,
सांस है फिर भी जिंदा नहीं हम,
कुछ इस कदर चुभा है सीने में,
इन्सान हो कर भी पथ्थर के बन गए हम.
हेमांगी-