इस तरह सोचा न था,
कि वक्त कि कैद में कैद हो जाऐंगे,
ता उम्र हसीन लम्हों के पीछे भाग रहे थे,
आज ऐक छोटीसी बात पे ठहर जाऐंगे,
तन्हाई कि कलम मैं,
इन्तजार कि शाही परोनी होगी,
और फिर ऐक बार रात कि चद्दर पें,
खवाबों कि सेज सजाते गुम हो जाऐंगे,
इस तरह सबकुछ ठहर जाऐंगा,
फिर भी दिल के किसी कोनों में कुछ सुलगता रहेगा.
हेमांगी-
14 MAY 2020 AT 16:24