18 JUN 2020 AT 14:10

था कभी.
था कभी की तंग गलियों में से गुजरते गुजरते मन थक सा गया है,
हे भी और नहीं भी की कश्मकश का बोझ दिल को अब तंग करता है,
वक्त के पहिये को पलट ने की कोशिश अब सांस को फूला देती है,
सर्द रातों मे तेरी यादों की गरमी नींद को पिघला देती है,
था कभी वो तंग गलियों से गुजरते गुजरते अब मन थक सा गया है.
हेमांगी

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